नई दिल्ली। दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने दावा किया कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से अधिक देशों में सेवाएं देने की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन भारत में अब तक उसे सेवा शुरू करने का लाइसेंस नहीं मिला है। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। राहुल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “भारत में आपका स्वागत है, एलन। दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए।” इसके जवाब में मस्क ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्थिति वास्तव में परेशान करने वाली है।
मस्क ने भारत में लाइसेंस मिलने में देरी पर उठाए सवाल
एलन मस्क ने गुरुवार को अपनी पोस्ट में कहा कि स्टारलिंक पिछले पांच वर्षों से भारत सरकार के सभी कानूनों और आवश्यक शर्तों का पालन कर रही है। इसके बावजूद कंपनी को भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस क्यों नहीं मिला है?
मस्क ने इस मामले में सवाल उठाते हुए उद्योगपति मुकेश अंबानी का जिक्र भी किया। उन्होंने पूछा कि क्या अंबानी देश के वास्तविक नियंत्रक हैं? उनके इस बयान के बाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की मंजूरी और दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस तेज हो गई है।
7 अक्टूबर को भी लगाया था भेदभाव का आरोप
इससे पहले 7 अक्टूबर को एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत के कुछ बड़े कारोबारी नहीं चाहते कि स्टारलिंक की सेवाएं देश में शुरू हों। उनके अनुसार, ऐसा होने से मौजूदा कंपनियों का एकाधिकार बना रह सकता है।
मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा था कि यह भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है। हालांकि, उन्होंने उस समय भी किसी कंपनी या उद्योगपति का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया था। उनके बयान को भारतीय दूरसंचार बाजार में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की संभावित प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखा गया।
सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर क्यों है चर्चा?
स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है। इस तकनीक से उन क्षेत्रों में भी इंटरनेट पहुंचाने की संभावना होती है, जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या फाइबर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना मुश्किल होता है।
भारत में इस सेवा की शुरुआत के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरियां, दूरसंचार नियमों का पालन और सुरक्षा संबंधी शर्तें महत्वपूर्ण हैं। सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन के तरीके और घरेलू दूरसंचार कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चर्चा होती रही है।
राहुल गांधी और मस्क की बातचीत से बढ़ी चर्चा
स्टारलिंक को भारत में लाइसेंस मिलने में देरी पर मस्क के सवाल और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। राहुल गांधी के संदेश के जवाब में मस्क ने धन्यवाद दिया और स्थिति पर चिंता जताई।
हालांकि, मस्क के आरोपों से यह अपने आप साबित नहीं होता कि किसी कारोबारी समूह के दबाव के कारण स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिला है। भारत में सेवा शुरू होने की स्थिति संबंधित सरकारी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करेगी। फिलहाल इस विवाद ने देश में सैटेलाइट इंटरनेट के भविष्य, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल कनेक्टिविटी को लेकर नई बहस छेड़ दी है।