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देश में बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार

 हर 1000 लड़कों पर 930 लड़कियां; पहली संतान बेटी होने वाले परिवारों में सबसे बड़ा बदलाव नई दिल्ली। देश में बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2015-16 में जहां हर 1,000 लड़कों पर 919 लड़कियों का जन्म होता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 930 हो गया है। ‘बेटी बचाओ, […]

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  • October 10, 2026 8:53 am IST, Published 3 hours ago

 हर 1000 लड़कों पर 930 लड़कियां; पहली संतान बेटी होने वाले परिवारों में सबसे बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। देश में बेटियों के जन्म अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2015-16 में जहां हर 1,000 लड़कों पर 919 लड़कियों का जन्म होता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 930 हो गया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के शुरुआती जिलों में हुए बदलावों पर आधारित एक शोध में यह बात सामने आई है। हालांकि, जन्म अनुपात में सुधार के बावजूद लैंगिक असमानता अब भी बनी हुई है। वहीं, शिक्षा के क्षेत्र में भी लड़कियां लड़कों से पीछे हैं।

पहली संतान बेटी होने पर ज्यादा दिखा सुधार

‘पॉलिसी इंटरवेंशंस एंड द सेक्स रेशियो एट बर्थ: एविडेंस फ्रॉम इंडिया’ रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी और उसके बाद की संतानों में लड़की के जन्म की संभावना में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सबसे अधिक बदलाव उन परिवारों में देखने को मिला, जिनकी पहली संतान बेटी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे परिवारों में दूसरी संतान के भी लड़की होने की संभावना 3.7 से 5.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ी। इसका अनुमानित अर्थ है कि हर 1,000 जन्म पर 37 से 53 अतिरिक्त लड़कियों का जन्म हुआ। इसके विपरीत, जिन परिवारों की पहली संतान बेटा थी, उनमें इस संबंध में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं पाया गया।

26 जिलों में लड़कियों का जन्म अनुपात लड़कों से अधिक

देश के 757 जिलों के आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया कि केवल 26 जिलों में जन्म के समय लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या अधिक दर्ज की गई। वहीं, 243 जिलों में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों का अनुपात 950 से 1,000 के बीच रहा।

रुद्रप्रयाग, कपूरथला, बारामूला, पुलवामा, उत्तरी गोवा, जैसलमेर और उडुपी जैसे जिलों में जन्म के समय लड़कियों का अनुपात बेहतर दर्ज किया गया। गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल भी इस मामले में बेहतर स्थिति वाले राज्यों में शामिल हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में अब भी पीछे हैं लड़कियां

जन्म अनुपात में सुधार के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में लड़कियों के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में उच्च माध्यमिक स्तर यानी 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रत्येक 100 लड़कों के मुकाबले केवल 59 लड़कियां ही यह स्तर पूरा कर पाती हैं।

वहीं, भारत में उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के व्यापक आंकड़ों में प्रत्येक 100 लड़कों के मुकाबले 89 लड़कियां यह स्तर हासिल कर पाती हैं। यूनेस्को की ‘शिक्षा तक पहुंच में लैंगिक समानता’ रिपोर्ट में 31 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक अंतर का अध्ययन किया गया है।

सुधार के बावजूद लैंगिक अंतर बरकरार

आंकड़े बताते हैं कि देश में बेटियों के जन्म को लेकर स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के बीच जन्म अनुपात में सुधार एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, केवल जन्म अनुपात में सुधार से लैंगिक समानता का लक्ष्य पूरा नहीं होगा। लड़कियों की शिक्षा, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर उनकी पढ़ाई जारी रखने तथा समान अवसर उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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