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दिल्ली दंगा केस: ताहिर हुसैन दोषी, 12 आरोपियों को राहत

कड़कड़डूमा कोर्ट ने दयालपुर में दंगा भड़काने के मामले में पूर्व पार्षद को ठहराया दोषी, सजा पर दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर की तारीख तय

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  • October 10, 2026 7:00 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली। दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया है। वहीं, इसी मामले में शामिल अन्य 12 आरोपियों को अदालत ने आरोपों से बरी कर दिया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में दंगा भड़काने और उससे संबंधित अन्य आरोपों के मामले में आया यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने ताहिर हुसैन की सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

मामले की सुनवाई दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 और धारा 109 के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, इस मामले में नामजद अन्य 12 आरोपियों को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। अब अदालत में अगली सुनवाई के दौरान दोषी की सजा की अवधि और उससे जुड़े कानूनी पहलुओं पर दलीलें सुनी जाएंगी।

ताहिर हुसैन की दोषसिद्धि से मामले में आया नया मोड़

दिल्ली दंगों से संबंधित यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके में हुई घटनाओं से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि संबंधित घटनाक्रम के दौरान दंगा भड़काने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी और आपराधिक साजिश जैसी गतिविधियों में आरोपियों की भूमिका थी।

अदालत के सामने मामले से संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने ताहिर हुसैन को दो धाराओं के तहत दोषी ठहराया, जबकि अन्य 12 आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया। इस फैसले के बाद मामले में दोषसिद्धि और बरी किए गए आरोपियों की स्थिति अलग-अलग हो गई है।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी मामले में दोषसिद्धि का फैसला और सजा निर्धारित करने की प्रक्रिया अलग-अलग न्यायिक चरण हो सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ताहिर हुसैन की सजा पर अंतिम निर्णय के लिए अदालत में 16 नवंबर को आगे की सुनवाई होगी।

किन धाराओं के तहत दोषी ठहराए गए ताहिर हुसैन?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अदालत ने ताहिर हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 147 और धारा 109 के तहत दोषी करार दिया है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 147 दंगा करने के अपराध से संबंधित थी। वहीं, धारा 109 अपराध के लिए उकसाने या दुष्प्रेरण से संबंधित प्रावधानों के तहत लागू होती थी, जब दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप अपराध किया गया हो और उसके लिए अलग से कोई विशेष दंड प्रावधान लागू न हो।

इस मामले में प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए थे। इनमें धारा 147, 148 और 149 के अलावा धारा 427, 436 तथा आपराधिक साजिश से संबंधित धारा 120बी का भी उल्लेख है।

धारा 427 संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, धारा 436 आग या विस्फोटक पदार्थ के माध्यम से घर अथवा अन्य निर्दिष्ट संपत्ति को नष्ट करने और धारा 120बी आपराधिक साजिश से संबंधित थी। हालांकि, प्राथमिकी में किसी धारा का उल्लेख होना और अदालत द्वारा उस धारा के तहत दोषसिद्धि किया जाना अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में ताहिर हुसैन को किन धाराओं में दोषी ठहराया गया है, इसे अदालत के निर्णय के अनुसार ही समझा जाना चाहिए।

13 आरोपियों में से 12 को अदालत से मिली राहत

इस मामले में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें ताहिर हुसैन के अलावा मोहम्मद शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मोहम्मद रिहान, मोहम्मद आबिद, अरशद कय्यूम, इरशाद अहमद, दीपक सिंह सैनी, नवनीत और महक सिंह के नाम शामिल थे।

अदालत ने सुनवाई के बाद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया, जबकि शेष 12 आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इस तरह 13 आरोपियों वाले मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि हुई और बाकी आरोपियों को न्यायिक राहत मिली।

आरोपियों को बरी किए जाने का अर्थ है कि इस मामले में अदालत ने उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों के आधार पर उन्हें दोषी नहीं पाया। इसे अन्य मामलों या अलग-अलग प्राथमिकी में उनकी कानूनी स्थिति पर स्वतः लागू नहीं माना जाना चाहिए। प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों, आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होता है।

दयालपुर इलाके की घटना से जुड़ा है मामला

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दयालपुर इलाके से जुड़ा यह मामला वर्ष 2020 में राजधानी में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पृष्ठभूमि में सामने आया था। उस दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई क्षेत्रों में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं के बाद पुलिस ने अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की और आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू की।

दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों में अदालतों के सामने अलग-अलग घटनाओं, आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई होती रही है। इसलिए किसी एक मामले में आया फैसला पूरे दंगा प्रकरण से जुड़े सभी मामलों का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

ताहिर हुसैन से संबंधित इस मामले में भी न्यायालय का फैसला उसी मुकदमे में प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के विरुद्ध दूसरे मामले में दर्ज आरोपों या लंबित मुकदमों की स्थिति इस निर्णय से अलग हो सकती है।

16 नवंबर को सजा पर होगी अहम सुनवाई

अदालत ने ताहिर हुसैन की सजा पर दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। इस सुनवाई में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष अपने-अपने तर्क रख सकते हैं। इसके बाद अदालत संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सजा के प्रश्न पर निर्णय लेगी।

सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष दोषसिद्धि के अनुरूप दंड की मांग कर सकता है, जबकि बचाव पक्ष सजा की अवधि या अन्य प्रासंगिक पहलुओं पर अपनी दलीलें प्रस्तुत कर सकता है। हालांकि, इस सुनवाई में दोनों पक्ष क्या तर्क रखते हैं और अदालत क्या निर्णय लेती है, यह आगे की न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगा।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ताहिर हुसैन को दोषी ठहराने का फैसला आ चुका है, लेकिन सजा की अवधि निर्धारित करने के लिए अगली सुनवाई बाकी है। ऐसे में 16 नवंबर की तारीख इस मामले की आगे की कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर

इस मामले में अदालत ने एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए 12 अन्य आरोपियों को बरी किया है। इससे स्पष्ट होता है कि एक ही मुकदमे में शामिल सभी आरोपियों के संबंध में न्यायालय का निष्कर्ष समान होना जरूरी नहीं है। प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उसके विरुद्ध प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाता है।

अब ताहिर हुसैन की सजा पर होने वाली सुनवाई के बाद मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होगी। साथ ही, अदालत के विस्तृत आदेश से दोषसिद्धि के आधार और संबंधित कानूनी निष्कर्षों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

निष्कर्ष: दिल्ली दंगों से जुड़े दयालपुर मामले में कड़कड़डूमा अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है, जबकि अन्य 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। सजा पर दलीलें सुनने के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। अब इस मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई और सजा संबंधी निर्णय पर नजर रहेगी।

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