आंध्र प्रदेश में बन रहा गूगल का डेटा सेंटर

160 एकड़ जंगल काटने का आरोप; पानी की खपत पर उठे सवाल विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का विशाल डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाया जा रहा है। करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के बीच बहस […]

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  • October 14, 2026 8:52 am IST, Published 2 hours ago

160 एकड़ जंगल काटने का आरोप; पानी की खपत पर उठे सवाल

विशाखापत्तनम। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का विशाल डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हब बनाया जा रहा है। करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना को लेकर विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के बीच बहस तेज हो गई है। आरोप हैं कि परियोजना के लिए 160 एकड़ जंगल साफ किया गया और पहाड़ी जमीन को समतल किया जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पानी की उपलब्धता, वन्यजीवों और आजीविका पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई है।

गूगल का कहना है कि पानी की जरूरत कम करने के लिए एयर-कूलिंग तकनीक अपनाई जाएगी। हालांकि, इस परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों और स्थानीय समुदाय को मिलने वाले वास्तविक लाभ पर सवाल बने हुए हैं।

तीन गांवों की 586 एकड़ जमीन पर बनेंगे तीन परिसर

राज्य सरकार ने परियोजना के लिए तीन गांवों की कुल 586 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। अदाविवरम-मुदासरलोवा क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू होने की जानकारी सामने आई है। परियोजना के तहत तीन परिसर विकसित किए जाने हैं। इनमें बड़े डेटा सेंटर और अंतरराष्ट्रीय समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली इंटरनेट केबलों से जुड़ा नेटवर्क भी शामिल होगा।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था और कंपनी के अनुसार परियोजना 2028 तक चालू हो सकती है। इससे क्षेत्र में डिजिटल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि, परियोजना के लिए जमीन के इस्तेमाल और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष भी सामने आया है।

160 एकड़ जंगल साफ करने का आरोप, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चिंता जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में बदलाव को लेकर है। आरोप लगाया गया है कि निर्माण के लिए लगभग 160 एकड़ जंगल साफ किया गया है। साथ ही, जमीन को समतल करने के लिए पहाड़ी हिस्सों को काटे जाने की बात भी कही गई है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने वन्यजीव अभयारण्य और जलाशय के नजदीक परियोजना विकसित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े निर्माण का असर आसपास के प्राकृतिक आवास, जैव विविधता और स्थानीय जलस्रोतों पर पड़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन उनकी आजीविका का प्रमुख आधार रही है। तरलुवाड़ा की पूर्व सरपंच पायला कोंडम्मा के मुताबिक, सर्वे के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि जमीन उनके पास ही रहेगी। किसान अप्पलाराजू ने भी वर्षों पहले आवंटित जमीन लिए जाने को लेकर आपत्ति जताई है।

हालांकि, जंगल की वास्तविक कटाई, जमीन के स्वामित्व और पर्यावरणीय प्रभावों से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

पानी की कमी की आशंका, गूगल ने एयर-कूलिंग तकनीक का दिया भरोसा

बड़े डेटा सेंटर में सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे काफी गर्मी पैदा होती है। इन सर्वरों को निर्धारित तापमान पर बनाए रखने के लिए प्रभावी शीतलन व्यवस्था की जरूरत होती है। इसी कारण परियोजना में पानी की खपत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों को आशंका है कि डेटा सेंटर की जरूरतों से क्षेत्र के जलस्रोतों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से उन इलाकों में यह चिंता अहम है, जहां पहले से पानी की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

गूगल की ओर से बताया गया है कि कंपनी ने स्थानीय मौसम, पानी की उपलब्धता और जलस्रोतों से जुड़े जोखिमों का आकलन करने के बाद एयर-कूलिंग तकनीक अपनाने का फैसला किया है। कंपनी के अनुसार, इस व्यवस्था में पारंपरिक तरल-आधारित शीतलन की तुलना में कम पानी की जरूरत हो सकती है।

हालांकि, एयर-कूलिंग अपनाने का अर्थ यह नहीं है कि पूरे परिसर में पानी की खपत शून्य हो जाएगी। परियोजना के संचालन के दौरान कुल जल उपयोग, पानी के स्रोत और स्थानीय जलस्रोतों पर प्रभाव का आकलन करना महत्वपूर्ण होगा।

पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर भी उठे सवाल

परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार के हलफनामे के अनुसार, पर्यावरणीय मंजूरी निर्माण क्षेत्र के आधार पर दी गई थी। वहीं, परियोजना के संचालन के दौरान होने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

इस मामले में मंजूरी की शर्तों, निर्माण के वास्तविक दायरे और संचालन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों की जांच अहम होगी। बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में केवल निर्माण की अनुमति ही नहीं, बल्कि पानी, बिजली, प्रदूषण और जैव विविधता पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन भी जरूरी है।

रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़ी उम्मीदें

गूगल की परियोजना से क्षेत्र में निवेश, तकनीकी गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। बड़े डेटा सेंटर के निर्माण और संचालन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।

लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी नौकरियां स्थानीय युवाओं को मिलती हैं, कितने छोटे कारोबार परियोजना से जुड़ते हैं और प्रभावित परिवारों की आजीविका की भरपाई कैसे होती है।

स्थानीय विकास का आकलन केवल निवेश की राशि से नहीं, बल्कि रोजगार की गुणवत्ता, पानी की उपलब्धता और पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे पहलुओं से भी किया जाना चाहिए।

इंडोनेशिया और चीन के उदाहरण क्यों हैं महत्वपूर्ण?

डेटा सेंटर के विस्तार के साथ दुनिया के कई हिस्सों में पानी और बिजली की खपत को लेकर बहस हुई है। इंडोनेशिया के बाटाम द्वीप में डेटा सेंटर और स्थानीय जलापूर्ति को लेकर लोगों की चिंताओं की खबरें सामने आई हैं। वहीं, चीन में कुछ डेटा सेंटर परियोजनाओं में पवन ऊर्जा और ठंडी जलवायु का उपयोग करके बिजली की जरूरत तथा शीतलन संबंधी चुनौतियों को कम करने के प्रयास किए गए हैं।

ये उदाहरण बताते हैं कि डेटा सेंटर विकसित करते समय स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। हर क्षेत्र में पानी, बिजली और जलवायु की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी एक मॉडल को सभी जगह समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी

विशाखापत्तनम में गूगल की परियोजना भारत के डिजिटल और एआई बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ जंगलों, जलस्रोतों और स्थानीय समुदाय की आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

परियोजना की सफलता इस बात से तय होगी कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय नियमों का पालन कितना प्रभावी ढंग से होता है, पानी की खपत कितनी नियंत्रित रहती है और स्थानीय लोगों को कितना प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन, जल उपयोग से संबंधित स्पष्ट आंकड़े और प्रभावित ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान इस परियोजना को लेकर भरोसा कायम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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