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SIR पर ओवैसी की सुप्रीम कोर्ट में दस्तक, समान मामलों के साथ सुनवाई की मांग

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके आधार पर मतदान के लिए पात्र लोगों की सूची तैयार और अद्यतन की जाती है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। वहीं, किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कानूनी आपत्तियां सामने आने पर उनका निपटारा संबंधित कानूनों और...

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • October 14, 2026 1:47 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ओवैसी की ओर से इस संबंध में याचिका दाखिल की गई है। इसमें मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दी गई है। मामले को लेकर उनके वकील निजामुद्दीन पाशा ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई की मांग रखी।

जानकारी के मुताबिक, निजामुद्दीन पाशा ने अदालत के सामने इस मामले का उल्लेख करते हुए अनुरोध किया कि ओवैसी की याचिका पर उन अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई की जाए, जिन पर अगले दिन सुनवाई प्रस्तावित है। इन याचिकाओं में भी एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि मामले को पहले से सूचीबद्ध समान विषय वाले प्रकरणों के साथ सुना जाए, ताकि संबंधित कानूनी सवालों पर एक साथ विचार हो सके।

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची की विस्तृत जांच और पुनरीक्षण करना होता है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं से जुड़ी जानकारियों का सत्यापन किया जा सकता है, ताकि सूची में मौजूद त्रुटियों को सुधारा जा सके और पात्र मतदाताओं के विवरण को अद्यतन रखा जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, दस्तावेजों की आवश्यकताओं और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। ओवैसी की याचिका में एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती दिए जाने के बाद अब इस मामले में अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

असदुद्दीन ओवैसी की ओर से दायर याचिका के विस्तृत तर्कों और उसमें उठाए गए सभी कानूनी आधारों की जानकारी उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि याचिका में किन-किन प्रावधानों को चुनौती दी गई है या याचिकाकर्ता ने अदालत से कौन-सी विशिष्ट राहत मांगी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया को न्यायिक समीक्षा के दायरे में लाना है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई की मांग ऐसे समय की गई है, जब इसी विषय से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी विचार किया जाना प्रस्तावित है। वकील निजामुद्दीन पाशा ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ से आग्रह किया कि ओवैसी की याचिका को भी उन मामलों के साथ शामिल किया जाए। समान विषय वाली याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई से अदालत को संबंधित कानूनी पहलुओं पर एक साथ विचार करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, याचिका पर सुनवाई कब और किस रूप में होगी, इसका अंतिम निर्णय अदालत ही करेगी।

मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि इसके आधार पर मतदान के लिए पात्र लोगों की सूची तैयार और अद्यतन की जाती है। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और अपात्र प्रविष्टियों को हटाने के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। वहीं, किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर कानूनी आपत्तियां सामने आने पर उनका निपटारा संबंधित कानूनों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है।

ओवैसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होगा। फिलहाल, याचिका दाखिल किए जाने और उसे अन्य समान मामलों के साथ सुनवाई के लिए रखने की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है। अदालत इस अनुरोध को स्वीकार करती है या मामले को अलग से सुनने का निर्णय लेती है, इस पर आगे की कार्यवाही के दौरान स्थिति स्पष्ट होगी।

 

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