नई दिल्ली। आज की डिजिटल जीवनशैली में घंटों तक कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना, मोबाइल पर वीडियो देखना और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लगातार शो देखना आम हो गया है। लेकिन लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने की यह आदत शरीर के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर सकती है। खासकर युवाओं में शारीरिक गतिविधियों की कमी, पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न और पैरों में भारीपन जैसी समस्याएं तेजी से चिंता का विषय बन रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठने, चलने और नियमित व्यायाम करने की सलाह देते हैं।
सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि चार घंटे तक लगातार बैठे रहना चार सिगरेट पीने जितना नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, इस तुलना को एक स्थापित वैज्ञानिक निष्कर्ष मानना सही नहीं होगा। बैठने के स्वास्थ्य प्रभाव और धूम्रपान के नुकसान अलग-अलग हैं। फिर भी, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
लंबे समय तक बैठने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
जब कोई व्यक्ति लगातार कई घंटों तक बैठा रहता है, तो उसकी मांसपेशियों की सक्रियता कम हो जाती है। इससे शरीर की ऊर्जा खपत घट सकती है और लंबे समय तक ऐसी दिनचर्या रहने पर वजन बढ़ने, मेटाबॉलिज्म से जुड़ी परेशानियों तथा हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेष रूप से ऐसे लोग, जिनका काम कंप्यूटर या लैपटॉप पर निर्भर है, अक्सर सुबह से शाम तक कुर्सी पर बैठे रहते हैं। कई बार काम के दबाव में उन्हें यह ध्यान ही नहीं रहता कि वे आखिरी बार अपनी सीट से कब उठे थे। यही आदत धीरे-धीरे शारीरिक निष्क्रियता को बढ़ावा देती है।
लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने से कमर, कंधे और गर्दन की मांसपेशियों पर भी दबाव पड़ सकता है। इससे पीठ दर्द, गर्दन में अकड़न और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि, इन समस्याओं की गंभीरता व्यक्ति की शारीरिक स्थिति, बैठने के तरीके और दैनिक गतिविधियों पर निर्भर करती है।
क्या लंबे समय तक बैठने से खून का थक्का बन सकता है?
लंबे समय तक बिना हिले-डुले बैठे रहने से पैरों में रक्त प्रवाह धीमा पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) यानी पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बनने का जोखिम बढ़ सकता है। यह स्थिति गंभीर हो सकती है, क्योंकि थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी जानलेवा जटिलता पैदा कर सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ घंटे बैठने वाला हर व्यक्ति DVT का शिकार हो जाएगा। इसका जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे पहले खून का थक्का बन चुका होना, हाल ही में बड़ी सर्जरी होना, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, कुछ गंभीर बीमारियां, गर्भावस्था और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां।
यदि लंबे समय तक बैठने के बाद किसी एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या त्वचा का रंग बदलने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। सांस लेने में अचानक परेशानी, सीने में दर्द, बेहोशी जैसा महसूस होना या खून वाली खांसी आपातकालीन संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
युवाओं के लिए क्यों बढ़ रही है चिंता?
आज पढ़ाई, नौकरी, गेमिंग और मनोरंजन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर निर्भर हो गया है। कई युवा लगातार कई घंटे मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं और दिनभर में पर्याप्त पैदल नहीं चलते। यदि बैठकर बिताए जाने वाले समय के साथ शारीरिक गतिविधि भी कम हो जाए, तो यह आदत भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकती है।
कम उम्र में किसी गंभीर बीमारी का जोखिम हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। फिर भी, बचपन और युवावस्था से सक्रिय जीवनशैली अपनाना लंबे समय तक स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि काम या पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे अंतराल रखें। हर 30 से 60 मिनट में उठकर कुछ देर चलना, हल्की स्ट्रेचिंग करना या खड़े होकर काम करना उपयोगी हो सकता है। यह अंतराल एक व्यावहारिक सुझाव है, कोई ऐसा निश्चित नियम नहीं जो हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लागू हो।
ऑफिस में बैठकर काम करते हैं तो अपनाएं ये 7 उपाय
1. हर घंटे उठकर चलें: लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से बचें। पानी पीने, थोड़ी देर चलने या छोटे कामों के लिए ब्रेक लें।
2. बैठने की मुद्रा सही रखें: पीठ को उचित सहारा दें, कंधों को सहज रखें और स्क्रीन को आंखों के लगभग समान स्तर पर रखने का प्रयास करें।
3. रोजाना पैदल चलें: लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करना, छोटी दूरी पैदल तय करना और दिनचर्या में चलने के अवसर बढ़ाना उपयोगी हो सकता है।
4. नियमित व्यायाम करें: अपनी क्षमता के अनुसार तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैरना या अन्य शारीरिक गतिविधियां अपनाएं।
5. लगातार स्क्रीन देखने से बचें: काम के बीच आंखों को आराम दें और कुछ देर स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखें।
6. पर्याप्त नींद लें: नियमित नींद और संतुलित दिनचर्या शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने में सहायक हैं।
7. लक्षणों को नजरअंदाज न करें: पैरों में असामान्य सूजन, लगातार दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करें।
कितना व्यायाम करना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि या 75 से 150 मिनट तेज तीव्रता वाली गतिविधि करने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन प्रमुख मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम भी उपयोगी हैं।
जो लोग अभी व्यायाम नहीं करते, वे शुरुआत में थोड़ी देर पैदल चलने से शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोगों के लिए नियमित व्यायाम के साथ दिनभर में बैठने का समय कम करना भी महत्वपूर्ण है।
यह समझना जरूरी है कि केवल सुबह व्यायाम कर लेना और फिर पूरे दिन बिना उठे बैठे रहना आदर्श दिनचर्या नहीं है। नियमित शारीरिक गतिविधि और बीच-बीच में सक्रिय रहना, दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या चार घंटे बैठना चार सिगरेट पीने के बराबर है?
इस सवाल का सीधा जवाब है कि दोनों को बराबर बताने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। सिगरेट के धुएं में मौजूद जहरीले पदार्थ कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनते हैं। दूसरी ओर, लंबे समय तक बैठे रहने से जुड़ा जोखिम मुख्य रूप से शारीरिक निष्क्रियता, बैठने की कुल अवधि और व्यक्ति की दूसरी स्वास्थ्य आदतों से संबंधित है।
इसलिए किसी एक संख्या या डरावनी तुलना के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय अपने दैनिक व्यवहार में सुधार करना अधिक उपयोगी है। लगातार बैठने की आदत को कम करना, नियमित चलना, संतुलित भोजन करना और धूम्रपान से दूर रहना बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
निष्कर्ष: लंबे समय तक लगातार बैठे रहना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। चार घंटे बैठने को चार सिगरेट के बराबर बताने वाले दावे को प्रमाणित तथ्य नहीं मानना चाहिए। सबसे बेहतर तरीका है कि दिनभर सक्रिय रहें, नियमित अंतराल पर उठें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।