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सूरजकुंड दिवाली मेले में संगीत, स्वदेशी उत्पाद और फूलों की खुशबू का संगम

फरीदाबाद। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की थीम पर आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेले में इन दिनों रौनक देखने को मिल रही है। मेले में जहां एक ओर देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी संगीत प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुओं, आकर्षक परिधानों और सजावटी […]

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Gauravshali Bharat News
  • October 26, 2026 6:50 am IST, Published 2 hours ago

फरीदाबाद। आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की थीम पर आयोजित तृतीय सूरजकुंड दिवाली मेले में इन दिनों रौनक देखने को मिल रही है। मेले में जहां एक ओर देश के प्रसिद्ध कलाकार अपनी संगीत प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्तुओं, आकर्षक परिधानों और सजावटी पौधों के स्टॉल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। करीब 300 स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के स्वदेशी उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनकी खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

सूफियाना संगीत ने बांधा समां

मेले की मुख्य चौपाल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। शुक्रवार की शाम सूफी गायक कंवर ग्रेवाल ने अपनी दमदार आवाज और सूफियाना अंदाज से समां बांध दिया। उनकी प्रस्तुति में पंजाबी लोक संगीत, प्रेम और आध्यात्मिकता की झलक देखने को मिली। दर्शकों ने उनकी गायकी का भरपूर आनंद लिया।

इसके बाद गुरमीत एंड ग्रुप की प्रस्तुति और हरियाणवी धाकड़ छोरियों के कार्यक्रम ने माहौल को और जीवंत बना दिया। वहीं अमित ढुल एंड ग्रुप ने ‘मस्त बना देंगे बीबा’, ‘इश्क बुल्ले नु नचावे’ और ‘मस्त कलंदर’ जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान हरियाणवी, पंजाबी और भोजपुरी संगीत की झलक भी देखने को मिली। लोकगीतों और लोकप्रिय धुनों पर दर्शक झूमते नजर आए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेले में देश की विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच मिल रहा है।

खुशबू नर्सरी में सजावटी पौधों की भरमार

दिवाली के अवसर पर घरों और कार्यालयों को सजाने के लिए मेले में उपलब्ध सजावटी पौधे भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। खुशबू नर्सरी में गुलाब की विभिन्न किस्मों के पौधों के साथ मनी प्लांट और अनेक प्रकार के फूलों तथा सजावटी पौधों की श्रृंखला उपलब्ध है।

लोग अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार पौधों की खरीदारी कर रहे हैं। घर के आंगन, बालकनी और कार्यालयों में हरियाली बढ़ाने के इच्छुक लोगों के लिए यह नर्सरी विशेष आकर्षण बनी हुई है। किफायती कीमतों पर उपलब्ध पौधे पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहे हैं।

महिलाओं के परिधान और आभूषणों की मांग

मेले में खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को महिलाओं के लिए विभिन्न डिजाइन और रंगों में सूट, कुर्ते, साड़ियां और आभूषण मिल रहे हैं। उत्पादों की विविधता के कारण खरीदार स्टॉल पर रुककर वस्तुओं की जानकारी ले रहे हैं और अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं।

इसके अलावा खादी के कपड़े, हर्बल सौंदर्य प्रसाधन, मिट्टी से बने पारंपरिक बर्तन, शहद और घर की सजावट से जुड़ी वस्तुएं भी उपलब्ध हैं। इन उत्पादों के माध्यम से लोगों को स्वदेशी वस्तुओं और पारंपरिक शिल्प से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास

सूरजकुंड दिवाली मेला केवल खरीदारी और मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का मंच भी बन रहा है। यहां पारंपरिक कला, खानपान, परिधान और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की विविधता देखने को मिल रही है।

संगीत कार्यक्रमों, हस्तशिल्प और सजावटी पौधों के आकर्षण के साथ सूरजकुंड दिवाली मेला लोगों को उत्सव का अनुभव प्रदान कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत की भावना के अनुरूप स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और देश की सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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