मुंबई। निर्देशक पुलकित की फिल्म Kartavya एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को पर्दे पर लाने की कोशिश करती है, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और डगमगाते क्लाइमैक्स के कारण यह दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ने में असफल रहती है। फिल्म ऑनर किलिंग, खाप पंचायत और सामाजिक कट्टरता जैसे संवेदनशील विषयों को केंद्र में रखती है, मगर कहानी की पकड़ बीच-बीच में ढीली पड़ जाती है।
फिल्म की कहानी झामली नाम के छोटे कस्बे से शुरू होती है, जिसकी पृष्ठभूमि हरियाणा जैसी प्रतीत होती है। यहां के ईमानदार एसएचओ पवन के किरदार में Saif Ali Khan नजर आते हैं। फिल्म की शुरुआत पवन के 40वें जन्मदिन से होती है, जहां उसका भरोसेमंद साथी अशोक, जिसकी भूमिका Sanjay Mishra ने निभाई है, उसके साथ दिखाई देता है। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकती और कहानी अचानक अपराध और साजिश के अंधेरे मोड़ पर पहुंच जाती है।
एक चर्चित महिला पत्रकार की हत्या पूरे मामले को रहस्य और तनाव से भर देती है। पत्रकार आध्यात्मिक गुरु आनंद श्री के खिलाफ नाबालिग बच्चों की गुमशुदगी की जांच करने आई होती है। आनंद श्री के किरदार में Saurabh Dwivedi दिखाई देते हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से प्रभाव छोड़ने की कोशिश की है। हालांकि फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका खलनायक है, जिसे लेखक और निर्देशक पूरी मजबूती से विकसित नहीं कर पाए। यही वजह है कि नायक और खलनायक के बीच टकराव उतना असरदार नहीं बन पाता, जितनी उम्मीद की जाती है।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब पवन का छोटा भाई दूसरी जाति की लड़की के साथ भाग जाता है। परिवार की कट्टर सोच रखने वाले पिता हरिहर के किरदार में Zakir Hussain नजर आते हैं, जो इसे परिवार की इज्जत से जोड़कर देखते हैं। इसके बाद फिल्म ऑनर किलिंग और जातिवाद के मुद्दों को सामने लाती है।
फिल्म में नाबालिग शूटर हरपाल का किरदार भी कहानी को दिलचस्प बनाता है। धार्मिक अंधभक्ति और अपराध के मेल को दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन स्क्रीनप्ले कई जगह बिखरा हुआ महसूस होता है। पुलिस अधिकारी केशव की भूमिका में Manish Chaudhari कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
अगर अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान ने एक ईमानदार और संघर्षशील पुलिस अधिकारी की भूमिका को गंभीरता से निभाया है। संजय मिश्रा हमेशा की तरह अपने किरदार में जान डालते हैं। लेकिन मजबूत कलाकारों के बावजूद फिल्म की कमजोर लेखनी और धीमा क्लाइमैक्स इसका असर कम कर देते हैं।
कुल मिलाकर Kartavya एक अच्छे विषय पर बनी फिल्म है, जिसमें सामाजिक संदेश देने की कोशिश की गई है। हालांकि कमजोर स्क्रिप्ट, अधूरा खलनायक और असंतुलित क्लाइमैक्स इसे एक यादगार फिल्म बनने से रोक देते हैं। यदि आप सामाजिक मुद्दों पर आधारित गंभीर ड्रामा पसंद करते हैं तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।