नई दिल्ली: आरपीआई(आ.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने पारित नहीं होने दिया। विपक्ष का यह विरोध देश की नारी शक्ति के साथ धोखा है।आरपीआई अध्यक्ष श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि कांग्रेस के इस कृत्य के विरोध में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया देश भर में सड़कों पर उतरकर पुरज़ोर तरीक़े से विरोध प्रदर्शन करेगी और विपक्ष की महिला विरोधी नीतियों को जन जन तक पहुँचाने का काम करेगी।
श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं के राजनैतिक उत्थान हेतु एक बड़ा निर्णय होने जा रहा था, लेकिन विपक्ष ने केवल ये सोचते हुए कि कहीं माननीय प्रधानमंत्री जी को इसका श्रेय न मिल जाए, इसलिए बिल का विरोध कर अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय दिया ।
श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि वर्तमान समय में जनसंख्या में बढ़ोतरी के कारण परिसीमन (delimitation) के द्वारा लोकसभा सीटों में वृद्धि करना नितांत आवश्यक है , लेकिन विपक्ष ने अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए अकारण ही इसका विरोध किया। श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन का विरोध कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के हिस्से में आने वाली सीटों का भी विरोध किया है ।
श्री आठवले जी ने कहा कि उन्हें यह बताना चाहता हूँ कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहाँ पर ही नहीं रुकेगी, बल्कि दूर तक जाएगी। विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न केवल हाल में चल रहे विधानसभा चुनावों में बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी झेलना पड़ेगा।
श्री आठवले जी ने कहा कि 27 वर्षों तक, महिला आरक्षण विधेयक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हाथों एक राजनीतिक मोहरे की तरह रहा और नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े परिसीमन ढांचे का विरोध करके, कांग्रेस पार्टी प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित कर रही है कि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू न हो पाए। केंद्रीय राज्यमंत्री के अनुसार कांग्रेस द्वारा परिसीमन बिल का विरोध केवल संयोग नहीं बल्कि इनकी सोची समझी रणनीति को दर्शाता है। श्री रामदास आठवले जी ने कहा कि कल का दिन हमारे देश के लोकतंत्र के लिए एक काला अध्याय था । यह केवल एक बिल का गिरना नहीं है, बल्कि करोड़ों बहनों के उस भरोसे का टूटना है जो उन्होंने एक बेहतर भविष्य के लिए संजोया था।