समाजवाद के लिए आज बहुत बड़ा दिन है। हम पुरबिया भईया लोग समाजवाद को जीने वाले गिरमिटिया मजदूर लोग है। आज भाजपा ने समाजवाद को शिखर पर पहुँचा दिया।पूर्वांचल और बिहार समाजवाद की नर्सरी है और बनारस समाजवाद की राजधानी है।आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण, राजनारायण जी, कर्पूरी ठाकुर से होते हुए समाजवाद स्वर्गीय श्री मुलायम सिंह यादव जी, स्वर्गीय राम विलास पासवान जी, माननीय लालू प्रसाद यादव जी, माननीय नीतीश कुमार जी के कन्धों पर पहुँच गया।
अब समाजवाद की जिम्मेदारी अखिलेश यादव जी, तेजस्वी यादव जी, चिराग पासवान जी के कंधे पर आ गई।भाजपा ने भी इस समाजवाद में जबरदस्त सेंध लगायी और समाजवाद को बुलंदियों पर पहुँचा दिया।लालू प्रसाद यादव जी के विद्यालय से राजनीति का ककहरा सीखने वाले और नीतीश जी के सुशासन माडल से शासन का अंक गणित सीखने वाले “सम्राट बाबू” को “बिहार का सम्राट” बना दिया। सम्राट चौधरी जी के रूप में 75 सालों बाद बिहार में भाजपा को पहला मुख्यमंत्री मिला।
पिछले 35 सालों से बिहार की सत्ता लालू प्रसाद यादव जी और नीतीश कुमार जी के बीच ही रही।नीतीश कुमार जी और उनकी पार्टी पिछले 20 सालों से लगातार बिहार की सत्ता पर काबिज है। लालू प्रसाद जी ने बिहार में सामाजिक ताने बाने को ठीक किया। बिहार में समाज के दबे-कुचले, पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यक वर्गों और दलितों में आत्मविश्वास जगाया। उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया और मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ा।सांप्रदायिकता के खिलाफ पूरी मजबूती से खड़े रहे और बिहार में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का प्रयास किया।उन्होंने ‘चरवाहा विद्यालय’ जैसे अनोखे विद्यालय खोले। लालू प्रसाद जी के खाते में मुस्लिम-यादव की जातीय गोलबंदी, पूरे प्रदेश में अपराध और जंगलराज,परिवारवाद, चारा घोटाला और बहुत सारे भ्रष्टाचार के आरोप भी आए।
नीतीश कुमार जी की बिहार में ताजपोशी का मुख्य कारण भी लालू प्रसाद जी की जातीय गोलबंदी और जंगलराज रहा।नीतीश कुमार जी ने बिहार को अपराध मुक्त करने का काम किया और सुशासन का राज्य कायम किया।नीतीश कुमार जी ने बिहार को “जंगल राज” से बदलकर “सुशासन” वाले राज्य के रूप में स्थापित किया, जिसके कारण उनको “सुशासन बाबू” भी कहा जाने लगा। उनकी मुख्य उपलब्धियों में महिला सशक्तिकरण ,पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण, मुख्यमंत्री साइकिल योजना’ से स्कूली लड़कियों की संख्या बढ़ी, “हर घर बिजली” अभियान से गांव-गांव तक बिजली पहुंचाना, राज्य में सड़कों का जाल फैलाना, ‘जीविका दीदी’ योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इत्यादि बहुत सारे काम रहे।नीतीश कुमार जी के सरकार की कमियों में मुख्य रूप से औद्योगिक विकास और आर्थिक पिछड़ापन, रोजगार सृजन में कमी, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था में कमजोरी, शराबबंदी के खराब क्रियान्वयन, लगातार गठबंधन बदलने के कारण कारण उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे।

अखंड बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ( 1947-1961) को उनके अतुलनीय, अद्वितीय व अविस्मरणीय योगदान के लिए बिहार के निर्माता के रूप में जाना जाता है। लोग उन्हें सम्मान और प्यार से “बिहार केसरी” और “श्रीबाबू” के नाम से संबोधित करते हैं। उनके शासनकाल में बिहार में उद्योग, कृषि, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य, कला व सामाजिक क्षेत्र में की उल्लेखनीय कार्य हुये।आजाद भारत की पहली रिफाइनरी- बरौनी ऑयल रिफाइनरी, एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग कारखाना-भारी उद्योग निगम (एचईसी) हटिया, देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट-सेल बोकारो, बरौनी डेयरी, आजाद भारत का पहला खाद कारखाना- सिन्दरी व बरौनी रासायनिक खाद कारखाना, एशिया का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड-गढ़हरा, आजादी के बाद गंगोत्री से गंगासागर के बीच प्रथम रेल सह सड़क पुल-राजेंद्र पुल, कोशी प्रोजेक्ट, पुसा व सबौर का एग्रीकल्चर कॉलेज, बिहार, भागलपुर, रांची विश्वविद्यालय इत्यादि जैसे अनगिनत उदाहरण हैं।
श्रीबाबू के शासनकाल के दौरान संसद के द्वारा नियुक्त फोर्ड फाउंडेशन के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री श्री एपेल्लवी ने अपनी रिपोर्ट में बिहार को देश का सबसे बेहतर शासित राज्य माना था और बिहार को देश की दूसरी सबसे बेहतर अर्थव्यवस्था बताया था।’भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान’ (IARI) जिसे पूसा इंस्टीट्यूट के नाम से जाना जाता है की स्थापना मूल रूप से 1905 में बिहार में हुई थी।अधिकांश कृषि अनुसंधान गतिविधियों को 1936 में पूसा (बिहार) से नई दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया था।आज आज बिहार की क्या स्थिति है उससे सब परिचित हैं।
भाजपा विकास की विचारधारा में विश्वास करती है।बिहार आर्थिक मोर्चे पर बहुत पिछड़ा हुआ है और निचले पायदान पर है।अब भाजपा के ऊपर बिहार में विकास की गंगा बहाने की जिम्मेदारी है।
एक बार पुनः बिहार के सम्राट को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।
