प्रसिद्ध चंद्रमा ऋषि आश्रम अब ईको टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के समग्र विकास के लिए 5 करोड़ रुपये की धन राशि स्वीकृत की गई है। इसका उद्देश्य न केवल पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करना है।
यह योजना आजमगढ़ के पर्यटन मानचित्र को और भी सशक्त बनाएगी। चंद्रमा ऋषि आश्रम का अपना धार्मिक महत्व है यह प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है।
अब इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस कर पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बनाया जाएगा।
परियोजना के तहत आश्रम परिसर में हरित क्षेत्र का विस्तार, स्वच्छता,पैदल पथ (वॉकिंग ट्रेल), बैठने की व्यवस्था, सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग, और जल संरक्षण के उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र, पार्किंग स्थल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली तरीके से किया जाएगा।
इस परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय हस्तशिल्प, भोजन और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय युवाओं को गाइड, सुरक्षा कर्मी और अन्य सेवाओं में रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा, महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर भी सृजित किए जाएंगे।
पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को ईको टूरिज्म के रूप में विकसित कर सतत विकास को बढ़ावा दिया जाए। चंद्रमा ऋषि आश्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगी ।
स्थानीय लोगों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र की पहचान बढ़ेगी, बल्कि बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार होगा। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि विकास कार्यों के दौरान आश्रम की मूल धार्मिक और प्राकृतिक पहचान को बनाए रखना जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस परियोजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। ईको टूरिज्म के जरिए पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।