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होर्मुज के साये में डूबता बांग्लादेश, ईंधन के लिए कतारों में खड़ा एक देश

दक्षिण एशिया का छोटा लेकिन तेजी से उभरता देश बांग्लादेश इन दिनों एक ऐसे संकट से गुजर रहा है, जिसने आम जनजीवन को लगभग ठहराव पर ला दिया है। सड़कों पर गाड़ियों की अंतहीन कतारें, पेट्रोल पंपों के बाहर घंटों का इंतज़ार, और शहरों में पसरी बेचैनी ।  इस संकट की जड़ें हजारों किलोमीटर दूर […]

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Gauravshali Bharat
inkhbar News
  • April 19, 2026 9:01 pm IST, Published 2 days ago

दक्षिण एशिया का छोटा लेकिन तेजी से उभरता देश बांग्लादेश इन दिनों एक ऐसे संकट से गुजर रहा है, जिसने आम जनजीवन को लगभग ठहराव पर ला दिया है। सड़कों पर गाड़ियों की अंतहीन कतारें, पेट्रोल पंपों के बाहर घंटों का इंतज़ार, और शहरों में पसरी बेचैनी ।

 इस संकट की जड़ें हजारों किलोमीटर दूर स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी हैं। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक यह जलडमरूमध्य, इन दिनों बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से लगभग ठप पड़ गया है। ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने इस रास्ते को असुरक्षित बना दिया है, जिसका सीधा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं। ऐसे देशों में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है बांग्लादेश, जो अपनी लगभग 95 प्रतिशत ईंधन जरूरतों के लिए बाहरी आपूर्ति पर निर्भर है। जैसे ही तेल की सप्लाई बाधित हुई, देश के भीतर ऊर्जा संकट गहराता चला गया।

राजधानी ढाका  से लेकर तटीय शहरों तक हालात बिगड़ चुके हैं। खासकर कॉक्स बाजार जैसे पर्यटन केंद्रों में स्थिति और भी विकट है। यहां पेट्रोल पंपों के बाहर सुबह से लगी कतारें देर रात तक खत्म नहीं होतीं। बांग्लादेश की सरकार ने हालात संभालने के लिए तात्कालिक कदम उठाए हैं। दफ्तरों के कामकाजी घंटे घटा दिए गए हैं, ताकि बिजली की खपत कम हो सके। स्कूल और कॉलेज अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं, क्योंकि परिवहन लगभग ठप हो चुका है। देश का नेशनल ग्रिड भी भारी दबाव में है।

इस संकट ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ गई है, व्यापार ठप होने लगा है और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी संघर्ष में बदल गई है। लोगों के बीच गुस्सा भी बढ़ रहा है,क्योंकि जिस जंग का मैदान उनके देश से हजारों किलोमीटर दूर है, उसकी कीमत उन्हें अपनी जेब और जीवन से चुकानी पड़ रही है।होर्मुज का यह संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक निर्भरता की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां एक रास्ते के बंद होते ही पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं हिल जाती हैं। बांग्लादेश आज उसी हकीकत का सबसे ताजा और दर्दनाक उदाहरण बन चुका है।

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