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आओ मानसून में फलदार वृक्षों की गुठलियाँ लगाएँ, पर्यावरण की सुरक्षा करें

नई दिल्ली : हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। संबंधित […]

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  • June 26, 2026 11:30 pm IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : हम सभी जानते हैं कि फल खाने वाले पक्षियों की संख्या दिल्ली में लगातार घटती जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण फलदार वृक्षों की लगातार कम होती संख्या है। इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने मित्रों के साथ वर्ष 2012 में फलदार वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की।

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शुरुआत में हम अपने स्वयं के पैसों से फलदार पौधे खरीदकर लगाते थे। उस समय 3–4 फीट ऊँचे एक स्वस्थ पौधे की कीमत लगभग ₹100 से ₹150 होती थी, जिससे यह अभियान काफी खर्चीला था।

फिर एक दिन मेरे मन में विचार आया कि क्यों न मानसून के दौरान फलों की गुठलियाँ और बीज ही लगाए जाएँ। हमने इस विचार को व्यवहार में उतारा और वर्षा ऋतु में बड़ी संख्या में जामुन, आम, इमली, बेर तथा अन्य फलदार वृक्षों की गुठलियाँ बोईं। अगले मानसून तक उनसे लगभग ढाई से तीन फीट ऊँचे स्वस्थ पौधे तैयार हो गए।

इसके बाद हमने इन पौधों का निःशुल्क वितरण शुरू किया और स्वयं भी उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित किया। आज हमारा पौधारोपण अभियान पूरी तरह निःशुल्क है।

मैं आप सभी से भी विनम्र आग्रह करता हूँ कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार इस मानसून में फलों की गुठलियाँ और बीज अवश्य लगाएँ। अगले वर्ष मानसून में तैयार पौधों को किसी उपयुक्त स्थान पर रोपित करें। बिना किसी बड़े खर्च के हम सभी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

पिछले वर्ष तिहाड़ जेल के बंदियों एवं स्टाफ के सहयोग से हमने बड़ी संख्या में जामुन की गुठलियाँ लगाई थीं, जो आज 2–3 फीट ऊँचे पौधों में विकसित हो चुकी हैं। इस वर्ष मानसून के दौरान दिल्ली सरकार के ‘वन महोत्सव’ अभियान में हम इन पौधों का निःशुल्क वितरण करेंगे तथा उन्हें उपयुक्त स्थानों पर रोपित भी करेंगे।

फलदार वृक्ष लगाने के अनेक लाभ हैं। ये न केवल पर्यावरण को हरा-भरा बनाते हैं, बल्कि फल खाने वाले सुंदर पक्षियों को भी पुनः उनके प्राकृतिक आवास में लौटने का अवसर प्रदान करते हैं। साथ ही हमें भी बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के ताज़े और पौष्टिक फल प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त ये वृक्ष प्रदूषण कम करने, वातावरण को शुद्ध रखने तथा भरपूर ऑक्सीजन उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आइए, इस मानसून एक संकल्प लें—हर घर, हर परिवार और हर नागरिक कम से कम एक फलदार वृक्ष की गुठली अवश्य लगाए। यही छोटा-सा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण की नींव बनेगा।

 

लेखक ✍️

योगेंद्र कुमार 

सह अधीक्षक( तिहाड़ जेल )

मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि (भारतीय पशु कल्याण बोर्ड )

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