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वन वॉट रूल क्या है? जानिए कैसे हो रही बिजली की बड़ी बचत

नई दिल्ली : बढ़ती बिजली खपत और ऊर्जा संरक्षण की चुनौती के बीच दुनिया भर में अपनाया जा रहा ‘वन वॉट रूल’ (One Watt Rule) एक ऐसा मानक है, जिसने करोड़ों यूनिट बिजली की बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह नियम खासतौर पर उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होने वाली छिपी हुई बिजली खपत को कम […]

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  • June 26, 2026 8:52 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली : बढ़ती बिजली खपत और ऊर्जा संरक्षण की चुनौती के बीच दुनिया भर में अपनाया जा रहा ‘वन वॉट रूल’ (One Watt Rule) एक ऐसा मानक है, जिसने करोड़ों यूनिट बिजली की बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह नियम खासतौर पर उन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से होने वाली छिपी हुई बिजली खपत को कम करने के लिए बनाया गया था, जो बंद होने के बावजूद बिजली लेते रहते हैं। इसे तकनीकी भाषा में स्टैंडबाय पावर (Standby Power) या वैम्पायर पावर (Vampire Power) कहा जाता है।

आज अधिकांश घरों में टीवी, माइक्रोवेव, सेट-टॉप बॉक्स, वाई-फाई राउटर, गेमिंग कंसोल, चार्जर और अन्य स्मार्ट उपकरण हर समय बिजली से जुड़े रहते हैं। भले ही इनका उपयोग न किया जा रहा हो, लेकिन ये स्टैंडबाय मोड में लगातार थोड़ी-थोड़ी बिजली की खपत करते रहते हैं। यही छोटी-छोटी खपत साल भर में बड़ी मात्रा में बिजली की बर्बादी का कारण बनती है।

क्या है वन वॉट रूल?

वन वॉट रूल की शुरुआत 1999 में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) द्वारा की गई थी। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्टैंडबाय मोड में 1 वॉट से अधिक बिजली की खपत न करे। इस पहल का मकसद दुनिया भर में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना और अनावश्यक बिजली की बर्बादी को रोकना था।

बाद में कई देशों ने इस मानक को अपनाया और इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने अपने उत्पादों के डिजाइन में बदलाव कर ऐसे उपकरण विकसित किए, जो स्टैंडबाय मोड में बेहद कम बिजली खर्च करते हैं।

स्टैंडबाय पावर क्यों है चिंता का विषय?

कई लोग यह मानते हैं कि टीवी या अन्य उपकरण रिमोट से बंद कर देने पर बिजली की खपत पूरी तरह बंद हो जाती है, जबकि ऐसा नहीं होता। रिमोट सिग्नल प्राप्त करने, घड़ी, डिस्प्ले या मेमोरी जैसी सुविधाओं को सक्रिय रखने के लिए उपकरण थोड़ी मात्रा में बिजली लेते रहते हैं।

यदि घर में कई ऐसे उपकरण लगातार स्टैंडबाय मोड में जुड़े हों, तो यह खपत महीने और साल के हिसाब से काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि ऊर्जा विशेषज्ञ समय-समय पर उपयोग में न आने वाले उपकरणों का प्लग निकालने या स्विच बंद करने की सलाह देते हैं।

उपभोक्ताओं को क्या फायदा हुआ?

वन वॉट रूल लागू होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने अधिक ऊर्जा दक्ष (Energy Efficient) उत्पाद बनाना शुरू किया। इससे उपभोक्ताओं को दोहरा लाभ मिला। पहला, बिजली की खपत कम हुई और दूसरा, बिजली का बिल भी घटा।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी घर में स्टैंडबाय पावर की अनावश्यक खपत को नियंत्रित कर लिया जाए, तो सालाना बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर बिजली उत्पादन का दबाव भी कम होता है।

पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका

बिजली की कम खपत का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है। जब बिजली की मांग कम होती है, तो बिजली उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधनों का उपयोग भी घटता है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है।

इसी वजह से कई देशों ने ऊर्जा दक्ष उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मानक और लेबलिंग सिस्टम भी विकसित किए हैं।

बिजली बचाने के आसान उपाय

उपयोग में न होने पर उपकरणों का मुख्य स्विच बंद करें।

मोबाइल चार्जर को चार्जिंग पूरी होने के बाद प्लग से निकाल दें।

स्टार रेटिंग वाले ऊर्जा दक्ष उपकरण खरीदें।

स्मार्ट पावर स्ट्रिप का उपयोग करें।

लंबे समय तक उपयोग न होने पर टीवी, माइक्रोवेव और सेट-टॉप बॉक्स का प्लग निकाल दें।

पुराने उपकरणों की जगह कम बिजली खपत वाले आधुनिक उपकरण अपनाएं।

भारत में बढ़ रही ऊर्जा दक्षता की जागरूकता

भारत में भी ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ऊर्जा दक्ष उपकरणों के उपयोग पर लगातार जोर दिया जा रहा है। ऊर्जा बचत से न केवल उपभोक्ताओं का बिजली बिल कम होता है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक परिवार स्टैंडबाय पावर की अनावश्यक खपत को कम करने की आदत विकसित करे, तो राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष करोड़ों यूनिट बिजली की बचत संभव है।

वन वॉट रूल दिखने में भले ही एक छोटा तकनीकी नियम लगे, लेकिन इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर बेहद बड़ा है। स्टैंडबाय मोड में बिजली की खपत को सीमित कर यह नियम ऊर्जा संरक्षण, बिजली बिल में कमी और पर्यावरण सुरक्षा—तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक योगदान दे रहा है। यदि उपभोक्ता भी अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी ऊर्जा बचत की आदतें अपनाएं, तो व्यक्तिगत बचत के साथ-साथ देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण सहयोग मिल सकता है।

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