नई दिल्ली : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं देश में आर्थिक उदारीकरण के प्रमुख शिल्पी रहे भारत रत्न पी. वी. नरसिम्हा राव की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया गया। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों तथा विभिन्न संस्थानों ने उनके योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला दूरदर्शी नेता बताया। सोशल मीडिया पर भी लाखों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके नेतृत्व और ऐतिहासिक निर्णयों को याद किया।
पी. वी. नरसिम्हा राव ने ऐसे समय में देश की बागडोर संभाली थी जब भारत गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था। विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम हो चुका था और देश की अर्थव्यवस्था कठिन दौर में थी। वर्ष 1991 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ मिलकर व्यापक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की। इन सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी और देश को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों ने भारत की आर्थिक संरचना में ऐतिहासिक बदलाव लाए। उद्योगों को नई स्वतंत्रता मिली, विदेशी निवेश को बढ़ावा मिला और व्यापारिक माहौल अधिक प्रतिस्पर्धी बना। इन नीतियों का प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जब भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ।
पी. वी. नरसिम्हा राव केवल आर्थिक सुधारों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने विदेश नीति, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की। उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान बनाई। उन्होंने अनेक देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया तथा बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप भारत की विदेश नीति को नई दिशा प्रदान की।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नरसिम्हा राव को शांत स्वभाव, गहन अध्ययन और दूरदर्शी सोच वाला नेता माना जाता है। वे कई भारतीय और विदेशी भाषाओं के जानकार थे तथा साहित्य और संस्कृति में भी उनकी विशेष रुचि थी। उनके व्यक्तित्व की यही विशेषताएँ उन्हें भारतीय राजनीति के सबसे विद्वान नेताओं में शामिल करती हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का प्रभाव आज भी देश की विकास यात्रा में देखा जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र, स्टार्टअप संस्कृति और विदेशी निवेश के विस्तार में उस दौर के निर्णयों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। आज भारत जिस आर्थिक मजबूती के साथ वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है, उसमें पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में लिए गए निर्णयों का बड़ा योगदान माना जाता है।
साल 2024 में भारत सरकार ने उनके असाधारण योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया। इस सम्मान ने उनके राजनीतिक और आर्थिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मान लंबे समय से अपेक्षित था।
जयंती के अवसर पर अनेक स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया, जहां उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन तथा कार्यों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को पी. वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व, नीति निर्माण और राष्ट्रहित में लिए गए साहसिक निर्णयों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
शिक्षाविदों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की आर्थिक प्रगति की कहानी में पी. वी. नरसिम्हा राव का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में साहसिक फैसले लेकर देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने का प्रयास किया और विकास की नई संभावनाओं का मार्ग खोला।
देशभर में उनकी जयंती पर आयोजित कार्यक्रमों में उनके योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक भारत की आर्थिक नींव को मजबूत करने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता और सुधारवादी सोच आज भी नीति निर्माताओं तथा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। भारत की लोकतांत्रिक और आर्थिक यात्रा में उनका योगदान सदैव सम्मान और गर्व के साथ याद किया जाता रहेगा।