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देश का पहला AI-आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल लॉन्च

अब डिजिटल होगी योजनाओं की निगरानी नई दिल्ली: गांवों के विकास को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने तकनीक का बड़ा सहारा लिया है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में देश का पहला एआई (AI) आधारित ‘रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल’ लॉन्च किया गया। इसके […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 28, 2026 10:21 pm IST, Published 1 hour ago

अब डिजिटल होगी योजनाओं की निगरानी

नई दिल्ली: गांवों के विकास को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार ने तकनीक का बड़ा सहारा लिया है। नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में देश का पहला एआई (AI) आधारित ‘रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल’ लॉन्च किया गया। इसके आने से अब ग्रामीण विकास योजनाओं का ऑडिट कागजी रिकॉर्ड के बजाय पूरी तरह डिजिटल और ऑनलाइन हो जाएगा।

नए एआई (AI) पोर्टल से क्या बदलेगा?

अब तक गांवों की विकास योजनाओं का ऑडिट पारंपरिक कागजी दस्तावेजों पर निर्भर था, जिससे पारदर्शिता की कमी रहती थी। इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से पूरी प्रक्रिया बदल जाएगी:

  • वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म: योजनाओं की प्लानिंग, जमीनी निरीक्षण, ऑडिट रिपोर्ट तैयार करना, सुधारात्मक कार्रवाई और पुराने मामलों की समीक्षा जैसे सभी काम अब एक ही पोर्टल पर होंगे।

  • गड़बड़ियों की पहले ही पहचान: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स की मदद से उन जिलों या योजनाओं को पहले ही फ्लैग (चिह्नित) कर लिया जाएगा, जहां वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी की आशंका ज्यादा होगी। इससे सरकार समय रहते कदम उठा सकेगी।

“केवल योजनाएं बनाना काफी नहीं, सही व्यक्ति तक लाभ पहुँचना जरूरी”: शिवराज सिंह चौहान

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन की शुरुआत करते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल फंड जारी करना या योजनाएं शुरू करना ही सरकार का मकसद नहीं है।

“ग्रामीण विकास का लक्ष्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि काम की गुणवत्ता, पारदर्शिता और लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। सरकारी मदद सही समय पर वास्तविक हकदार तक पहुंचनी चाहिए।” — शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री

इसके लिए उन्होंने लाभार्थियों के वेरिफिकेशन (सत्यापन) को मजबूत करने, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए ग्रामीण महिलाओं की कमाई बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा देने की बात कही।

प्लास्टिक कचरे से बनेंगी ग्रामीण सड़कें

सड़कों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए सम्मेलन में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर चर्चा हुई। अब ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य तय समय सीमा के भीतर नई सड़कें बनाकर गांवों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और रोजगार के मुख्य केंद्रों से सीधे जोड़ना है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी बड़ी योजनाओं की व्यापक समीक्षा भी की गई।

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