नई दिल्ली: देश की सुरक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की महत्वपूर्ण बैठक आज आयोजित होने जा रही है। बैठक में थल सेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने से जुड़े कई बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। उम्मीद है कि विभिन्न आधुनिक हथियार प्रणालियों, मिसाइलों, ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद को मंजूरी मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों और स्वदेशी एलसीए तेजस के लिए लगभग 600 HAMMER (Highly Agile Modular Munition Extended Range) प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों की खरीद के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इन हथियारों के शामिल होने से वायुसेना की सटीक लक्ष्य भेदन क्षमता और ऑपरेशनल प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इन हथियारों के निर्माण में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है।
बैठक में भारतीय थल सेना के लिए आधुनिक मिसाइल प्रणाली से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं। प्रस्ताव के तहत करीब 100 लॉन्चर, 2,300 मिसाइलें और पांच सिम्युलेटर खरीदने पर विचार किया जाएगा। इन प्रणालियों का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाता है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सेना की वायु रक्षा और सामरिक प्रतिक्रिया क्षमता को और अधिक मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा रक्षा खरीद परिषद के एजेंडे में बड़ी संख्या में ड्रोन और उनसे जुड़े उन्नत सिस्टम की खरीद का प्रस्ताव भी शामिल है। हाल के वर्षों में आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ी है। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, सीमा सुरक्षा और सटीक हमलों जैसे अभियानों में ड्रोन अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में सेना की तीनों शाखाओं के लिए नई पीढ़ी के ड्रोन और संबंधित तकनीकों की खरीद को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलने से भारतीय सशस्त्र बलों की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कई प्रणालियों के निर्माण में भारतीय रक्षा कंपनियों की भागीदारी है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण की नीति को भी मजबूत करेगा।
रक्षा खरीद परिषद देश में रक्षा उपकरणों की खरीद से जुड़े बड़े फैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था है। इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं और इसमें रक्षा मंत्रालय तथा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। परिषद की मंजूरी के बाद संबंधित रक्षा सौदों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, सीमाओं पर उभरती चुनौतियों और आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों का तकनीकी रूप से लगातार उन्नयन आवश्यक है। ऐसे में आज की बैठक से कई महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना है, जिनका सीधा प्रभाव देश की सुरक्षा और सैन्य तैयारियों पर पड़ेगा।