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अनंत सिंह की बढ़ीं मुश्किलें, रोड शो में अनुमति से ज्यादा गाड़ियों पर तीन FIR दर्ज

एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार के राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में अब आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर लोगों की नजर है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यक्रम के दौरान नियमों का किस हद तक उल्लंघन हुआ और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही।

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  • October 19, 2026 4:00 pm IST, Published 36 minutes ago

बिहार की मोकामा विधानसभा सीट से जेडीयू विधायक अनंत सिंह और जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला एक रोड शो और ‘जन अधिकार यात्रा’ से जुड़ा है, जिसके लिए प्रशासन से अनुमति ली गई थी। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान निर्धारित संख्या से अधिक वाहनों को शामिल किया गया। इसके बाद बाढ़ और मोकामा थाना पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर कुल तीन एफआईआर दर्ज की हैं।

जानकारी के मुताबिक, रोड शो में शामिल होने के लिए आयोजकों ने प्रशासन से 10 वाहनों की अनुमति ली थी। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान इससे अधिक वाहनों के इस्तेमाल का आरोप सामने आया। बताया गया है कि फूलों की वर्षा के लिए 15 से अधिक जेसीबी मशीनें भी लगाई गई थीं। प्रशासन की अनुमति और कार्यक्रम में शामिल संसाधनों की संख्या में कथित अंतर को आचार संहिता के उल्लंघन का आधार बनाया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े तथ्यों और शिकायतों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।

इस प्रकरण में दर्ज तीन एफआईआर में से दो बाढ़ थाना क्षेत्र में दर्ज की गई हैं। इनमें एक प्राथमिकी पुलिस के दारोगा के बयान पर, जबकि दूसरी अंचलाधिकारी के बयान के आधार पर दर्ज हुई। तीसरी प्राथमिकी मोकामा थाने में अंचलाधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई है। तीनों मामलों में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। अनंत सिंह के अलावा उनके रिश्तेदार कर्मवीर सिंह का नाम भी दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा बताया गया है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार के राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर अनंत सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में अब आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर लोगों की नजर है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यक्रम के दौरान नियमों का किस हद तक उल्लंघन हुआ और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही। गिरफ्तारी को लेकर भी फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

अनंत सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और अपने बयानों तथा राजनीतिक गतिविधियों के कारण अक्सर चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका एक बयान भी सुर्खियों में आया था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने संबंधों का जिक्र किया था। वायरल वीडियो में उन्होंने दावा किया था कि नीतीश कुमार के राजनीतिक संघर्ष के दौर में उनकी मदद करने के लिए उन्होंने नौ लोगों की हत्या करवाई थी। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई।

बाद में अनंत सिंह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया। हालांकि, उनके कथित बयान को लेकर उठे सवालों के बीच अब रोड शो के मामले में एफआईआर दर्ज होने से उनकी राजनीतिक गतिविधियां फिर चर्चा में हैं। बयान से संबंधित दावे और उनका वास्तविक संदर्भ अलग विषय हैं, जबकि मौजूदा पुलिस कार्रवाई चुनावी आचार संहिता के कथित उल्लंघन से जुड़ी है।

चुनाव के दौरान प्रशासन की अनुमति के बिना निर्धारित सीमा से अधिक वाहनों या प्रचार संसाधनों का इस्तेमाल करना नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है। ऐसे मामलों में पुलिस और निर्वाचन से जुड़े अधिकारी शिकायतों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हैं। मोकामा रोड शो प्रकरण में भी जांच के दौरान अनुमति पत्र, वाहनों की संख्या और कार्यक्रम के वीडियो या अन्य साक्ष्यों की अहम भूमिका हो सकती है। फिलहाल तीन एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। अब देखना होगा कि इस मामले में पुलिस आगे क्या कदम उठाती है और क्या आरोपों के संबंध में कोई नई जानकारी सामने आती है।

 

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