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रामकुमार सिंह हत्याकांड में मुख्य आरोपित चंदन सिंह और अभिषेक यादव गिरफ्तार

रामकुमार सिंह की हत्या 15 अक्टूबर की सुबह आरा शहर के कनकपुरी मोहल्ले में हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की। पुलिस लगातार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही थी। जांच के दौरान संदिग्धों की गतिविधियों और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए।

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Gauravshali Bharat News
  • October 19, 2026 6:00 pm IST, Published 49 minutes ago

आरा:  बिहार के भोजपुर जिले में सेवानिवृत्त कस्टम अधिकारी और क्षत्रिय कल्याण संगठन के अध्यक्ष रामकुमार सिंह की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। भोजपुर पुलिस की विशेष टीम ने हत्याकांड के मुख्य आरोपित चंदन सिंह और उसके कथित साथी अभिषेक यादव को पश्चिम बंगाल के दमदम एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित के नेतृत्व में कोलकाता पुलिस की सहायता से की गई। गिरफ्तारी के बाद दोनों से पूछताछ की जा रही है, ताकि हत्या के पीछे की वजह और कथित साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सके।

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपित चंदन सिंह भोजपुर जिले के टाउन थाना क्षेत्र स्थित बड़की सिंगही गांव का निवासी है। इस मामले में इससे पहले मनोज सिंह उर्फ लक्की को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब चंदन सिंह और अभिषेक यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को जांच में आगे बढ़ने और अन्य संभावित आरोपितों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, दोनों की कथित भूमिका और मामले से जुड़े अन्य आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

रामकुमार सिंह की हत्या 15 अक्टूबर की सुबह आरा शहर के कनकपुरी मोहल्ले में हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की। पुलिस लगातार अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही थी। जांच के दौरान संदिग्धों की गतिविधियों और उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए गए।

मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की अहम भूमिका बताई जा रही है। पुलिस इन साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की आवाजाही और आपसी संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी थी। आरोपितों की तलाश में टीम ने पश्चिम बंगाल से लेकर सिक्किम तक अभियान चलाया। इस कार्रवाई में पटना एसटीएफ की मदद भी ली गई। आखिरकार कोलकाता पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपितों को दमदम एयरपोर्ट से पकड़ लिया गया।

जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी सामने आया कि हत्या से पहले मुख्य आरोपितों में से एक के बैंक खाते से पांच लाख रुपये निकाले गए थे। पुलिस इस लेन-देन की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम किस उद्देश्य से निकाली गई थी। क्या इस पैसे का संबंध कथित साजिश या वारदात को अंजाम देने में शामिल लोगों से था, इसकी पुष्टि अभी जांच के आधार पर होनी है। पुलिस आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।

इसके अलावा, वारदात से पहले नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड खरीदे जाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किसने किया और संबंधित नंबरों के जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया। मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल विवरण और अन्य तकनीकी जानकारियों के जरिए आरोपितों के बीच संभावित संपर्कों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस पेशेवर शूटरों की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। इस पहलू के तहत कथित तौर पर शामिल लोगों के संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और वारदात से पहले की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि दोनों आरोपितों से पूछताछ के दौरान हत्याकांड से जुड़े कुछ और तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस का ध्यान हत्या के पीछे के मकसद, कथित साजिश में शामिल अन्य लोगों और आर्थिक लेन-देन की वास्तविक भूमिका का पता लगाने पर है। जांच पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट होगी। पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

 

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