बिहार में सरकारी ठेकों से जुड़े कथित घोटाले की जांच अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में अलग-अलग अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। इसी कड़ी में 2013 बैच के आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार से बुधवार को करीब छह घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। धर्मेंद्र कुमार बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष हैं। जांच के दौरान उनसे ठेकेदार रिशुश्री के साथ कथित निजी और वित्तीय संबंधों को लेकर सवाल पूछे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पूछताछ के आधार पर किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता और मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
सरकारी ठेकों से संबंधित इस मामले में ईडी कथित वित्तीय लेनदेन, ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच संपर्क तथा ठेका आवंटन की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े फैसलों में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं। धर्मेंद्र कुमार से हुई पूछताछ को भी इसी जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान ठेकेदार रिशुश्री और कुछ सरकारी अधिकारियों के बीच कथित संपर्कों पर ध्यान दिया जा रहा है। धर्मेंद्र कुमार से भी इसी संदर्भ में सवाल किए गए। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि संबंधित लोगों के बीच किस प्रकार के व्यावसायिक या वित्तीय संबंध थे और क्या उनका किसी सरकारी ठेके या भुगतान से कोई संबंध था। हालांकि, इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
धर्मेंद्र कुमार बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राज्य में पुलों और अन्य संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण में सरकारी ठेकों की भूमिका अहम होती है। ऐसे में ठेका आवंटन, परियोजनाओं की लागत, भुगतान और काम की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। यदि किसी परियोजना में अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए तथ्यों का पता लगाती हैं।
ईडी की जांच में ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच कथित संबंधों का पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सरकारी ठेकों में कई स्तरों पर निर्णय लिए जाते हैं। इनमें निविदा जारी करना, पात्रता की जांच, ठेका आवंटन, भुगतान और परियोजना के काम का सत्यापन शामिल हो सकता है। जांच एजेंसी इन प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करके यह पता लगा सकती है कि नियमों का पालन किया गया या नहीं। हालांकि, इस मामले में किसी विशेष अनियमितता की पुष्टि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है।
रिशुश्री का नाम सामने आने के बाद इस मामले में ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों के बीच कथित संपर्कों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि रिशुश्री और धर्मेंद्र कुमार के बीच किस तरह के संबंध थे या उनका किसी कथित वित्तीय अनियमितता में कोई प्रत्यक्ष योगदान था। इन सवालों के जवाब जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और आधिकारिक बयानों से ही स्पष्ट होंगे।
बिहार में सरकारी ठेकों से जुड़ी जांच का दायरा बढ़ने के बीच ईडी की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। धर्मेंद्र कुमार से करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी आगे किन पहलुओं की पड़ताल करती है और क्या अन्य अधिकारियों या संबंधित लोगों से भी पूछताछ की जाती है। फिलहाल, मामले में जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक निष्कर्षों का इंतजार करना होगा।