पटना: बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्षी दल जहां घटना को लेकर सरकार की कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से कार्रवाई का हवाला देते हुए विपक्ष पर मामले को राजनीतिक रंग देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी बिहार सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
प्रशांत किशोर ने जमुई की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और सरकार से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जवाब देने की मांग की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब जमुई की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई गई है।
इस राजनीतिक विवाद के बीच प्रशांत किशोर ने अलीनगर से भाजपा विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर को भी निशाने पर लिया। उन्होंने उनके हालिया सार्वजनिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब उनके क्षेत्र के लोग बाढ़ और अपराध जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब जनप्रतिनिधि के तौर पर उनकी प्राथमिकताएं क्या होनी चाहिए। किशोर ने दावा किया कि दरभंगा के लोगों ने मैथिली ठाकुर को अपना प्रतिनिधि और आइकन बनाकर समर्थन दिया, लेकिन वह अंबानी परिवार के गणेश उत्सव जैसे कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे रही हैं।
मैथिली ठाकुर का अंबानी परिवार के गणेश उत्सव में शामिल होना और प्रस्तुति देना मीडिया रिपोर्टों में भी सामने आया है। हालांकि, प्रशांत किशोर की इस टिप्पणी को राजनीतिक आलोचना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना या प्रस्तुति देना अपने आप में विधायक के क्षेत्रीय दायित्वों के निर्वहन के बारे में कोई निष्कर्ष स्थापित नहीं करता।
प्रशांत किशोर ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मैथिली ठाकुर के पुराने बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के कारण किसी महिला के लिए रात में बाहर निकलना संभव हो सकता है, लेकिन आम लड़कियों और महिलाओं के लिए सुरक्षा की स्थिति अलग है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा माहौल में सामान्य लोग, यहां तक कि लड़के भी रात में बाहर निकलने को लेकर सावधानी बरतने लगे हैं।
हालांकि, मैथिली ठाकुर से जुड़ा एक पुराना वीडियो जमुई की मौजूदा घटना के संदर्भ में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। फैक्ट-चेक रिपोर्ट के अनुसार वह वीडियो अप्रैल 2026 का है और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान रिकॉर्ड किया गया था। यानी उसे जमुई मामले पर मैथिली ठाकुर की हालिया प्रतिक्रिया के रूप में पेश करना सही नहीं है।
जमुई की घटना 19 सितंबर की शाम सामने आई थी। पुलिस के अनुसार एक किशोर लड़का और लड़की कोचिंग से लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक समूह ने उन्हें कथित तौर पर रोका और उनके साथ मारपीट तथा अभद्र व्यवहार किया। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। मामले में पॉक्सो कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है।
घटना के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और घटना से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो के प्रसार को रोकने के संबंध में भी निर्देश दिए हैं।
इस घटना ने बिहार में महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष के कई नेताओं ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से पुलिस कार्रवाई का हवाला दिया जा रहा है। ऐसे में जमुई की घटना अब केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में चर्चा में आ गई है। प्रशांत किशोर की ताजा टिप्पणी ने इस राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है।