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गया पहुंचीं स्मिता ठाकरे, बाला साहेब के लिए हुआ पिंडदान

पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में यहां पहुंचते हैं और फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर तथा विभिन्न पिंडवेदियों पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

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  • October 1, 2026 5:30 pm IST, Published 48 minutes ago

गया, बिहार : बिहार की धार्मिक नगरी गया एक बार फिर पितृपक्ष के दौरान आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। इसी क्रम में शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे ने गया पहुंचकर अपने दिवंगत ससुर बाला साहेब ठाकरे, पिता मधुकर चित्रे और परिवार के अन्य पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया। गया में हुए इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्मिता ठाकरे भावुक भी नजर आईं।

गया में पिंडदान और श्राद्ध की परंपरा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पूर्वजों की स्मृति में यहां पहुंचते हैं और फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर तथा विभिन्न पिंडवेदियों पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इसी परंपरा के तहत स्मिता ठाकरे ने भी गया पहुंचकर अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

बाला साहेब ठाकरे की तस्वीर के सामने हुआ धार्मिक अनुष्ठान

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान बाला साहेब ठाकरे की तस्वीर को सामने रखा गया। पंडितों और तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध से जुड़े कर्मकांड किए गए। इस दौरान स्मिता ठाकरे ने अपने ससुर के साथ-साथ अपने पिता और परिवार के अन्य पूर्वजों को भी याद किया।

गया की धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृपक्ष में पिंडदान करने के लिए श्रद्धालु अलग-अलग पिंडवेदियों पर धार्मिक विधियां पूरी करते हैं। फल्गु नदी और विष्णुपद मंदिर क्षेत्र इन अनुष्ठानों के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए पूजा, तर्पण और पिंडदान करते हैं।

लंबे समय से गया आने की थी इच्छा

स्मिता ठाकरे ने गया में पिंडदान करने की इच्छा से जुड़ी अपनी भावनाएं भी साझा कीं। बताया गया कि वह लंबे समय से गया आकर अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करना चाहती थीं। गुरु के आशीर्वाद और धार्मिक परंपरा के प्रति आस्था के साथ उन्होंने इस यात्रा को पूरा किया।

पिंडदान के दौरान उन्होंने अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद किया। उनके लिए यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि परिवार की पिछली पीढ़ियों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर भी रहा। गया की धार्मिक मान्यताओं से जुड़े इस अनुष्ठान के दौरान परिवार और पूर्वजों की स्मृतियां उनके साथ रहीं।

महिलाओं के पिंडदान को लेकर भी चर्चा

स्मिता ठाकरे के गया दौरे के दौरान महिलाओं द्वारा पिंडदान किए जाने का विषय भी चर्चा में रहा। उन्होंने बताया कि पहले उनके मन में यह धारणा थी कि महिलाओं द्वारा पिंडदान नहीं किया जाता। हालांकि, गया से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और माता सीता के पिंडदान से संबंधित मान्यता की जानकारी मिलने के बाद उनके विचार में बदलाव आया।

गया की धार्मिक परंपरा में माता सीता से जुड़ी पिंडदान की कथा का विशेष उल्लेख मिलता है। इसी धार्मिक संदर्भ के बीच स्मिता ठाकरे ने भी अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने इसे श्रद्धा और पारिवारिक दायित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताया।

बाला साहेब ठाकरे की याद में किया गया पिंडदान

पिंडदान के दौरान बाला साहेब ठाकरे की तस्वीर को विशेष रूप से सामने रखा गया। स्मिता ठाकरे ने अपने दिवंगत ससुर को याद करते हुए उनके जीवन और परिवार से जुड़ी स्मृतियों को भी साझा किया। बाला साहेब ठाकरे भारतीय सार्वजनिक जीवन के चर्चित व्यक्तित्वों में रहे हैं और उन्होंने शिवसेना की स्थापना की थी।

नवंबर 2012 में बाला साहेब ठाकरे के निधन के बाद परिवार की ओर से समय-समय पर धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें याद किया जाता रहा है। गया में पिंडदान भी इसी पारिवारिक श्रद्धा और धार्मिक परंपरा से जुड़ा एक अवसर रहा।

पितृपक्ष में गया क्यों आता है चर्चा में?

गया को हिंदू धार्मिक परंपरा में पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया में पिंडदान करने से पितरों की शांति के लिए धार्मिक कर्म पूरा होता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के समय गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां आने वाले लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और आस्था के अनुसार अलग-अलग धार्मिक विधियों को पूरा करते हैं।

स्मिता ठाकरे के दौरे ने भी इस धार्मिक परंपरा की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। महाराष्ट्र के ठाकरे परिवार से जुड़ी एक प्रमुख महिला सदस्य का बिहार के गया में पहुंचकर पूर्वजों के लिए पिंडदान करना धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना।

धार्मिक यात्रा के बीच राजनीतिक चर्चा भी

स्मिता ठाकरे के गया दौरे के बाद उनके सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि, गया पहुंचने का तत्काल संदर्भ अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना रहा। इस यात्रा में धार्मिक अनुष्ठान और परिवार के दिवंगत सदस्यों का स्मरण प्रमुख रूप से सामने आया।

गया में पितृपक्ष के दौरान होने वाले धार्मिक आयोजन देश की अलग-अलग पारिवारिक परंपराओं को एक मंच पर लाते हैं। अलग-अलग राज्यों और समुदायों से आने वाले लोग यहां अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। स्मिता ठाकरे का गया पहुंचना भी इसी व्यापक धार्मिक परंपरा का हिस्सा रहा।

कुल मिलाकर, गया की धरती पर स्मिता ठाकरे द्वारा बाला साहेब ठाकरे और परिवार के अन्य पूर्वजों के लिए किया गया पिंडदान व्यक्तिगत श्रद्धा, पारिवारिक स्मृति और धार्मिक परंपरा से जुड़ा अवसर रहा। पितृपक्ष के दौरान गया में होने वाले ऐसे धार्मिक अनुष्ठान इस प्राचीन तीर्थस्थल की धार्मिक महत्ता को भी सामने लाते हैं।

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