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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बड़ा खुलासा, यूपी की दो महिलाएं गिरफ्तार

अपराध : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में हथियारों की कथित सप्लाई को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है। तस्वीर के साथ साझा की गई खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश की दो महिलाओं, राधा और बबीता, को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि […]

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  • October 21, 2026 10:00 pm IST, Published 1 hour ago

अपराध : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में हथियारों की कथित सप्लाई को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है। तस्वीर के साथ साझा की गई खबर के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश की दो महिलाओं, राधा और बबीता, को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों ने कथित तौर पर टेनिस बॉल के जरिए पिस्तौल के कुछ हिस्से पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। पुलिस इस मामले में अन्य संदिग्धों और हथियारों की सप्लाई से जुड़े संपर्कों की भी जांच कर रही है।

यह मामला इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि जांच केवल फायरिंग करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित तौर पर हथियार उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क और उसके सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश भी की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में यूपी की दो महिलाएं गिरफ्तार

मुंबई में 18 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें उत्तर प्रदेश की रहने वाली राधा और बबीता के अलावा हरियाणा के सोनीपत निवासी कुणाल और सुमित शामिल हैं। पुलिस को संदेह है कि इन आरोपियों ने कथित तौर पर हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई थी।

इस घटनाक्रम ने मुंबई से दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक फैले कथित हथियार आपूर्ति नेटवर्क को लेकर जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए, आरोपियों के बीच संपर्क कैसे स्थापित हुआ और फायरिंग की घटना से पहले तथा बाद में किन लोगों ने मदद की।

फायरिंग की घटना के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार

पुलिस के अनुसार, 18 अक्टूबर को मुंबई में टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई थी। घटना के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपियों की पहचान करने, उनके संभावित ठिकानों का पता लगाने और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े लोगों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई तेज की।

इस मामले में शुरुआती जांच के दौरान फायरिंग करने वाले संदिग्धों और उन्हें सहायता पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर खंगाली गई। इसके बाद जांच का दायरा हथियारों की कथित खरीद, परिवहन और सुपुर्दगी तक पहुंचा।

इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अक्टूबर को चार लोगों को गिरफ्तार किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और मुंबई पुलिस ने मामले में आगे की पूछताछ के लिए उन्हें अपनी जांच में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की।

राधा और बबीता पर क्या हैं आरोप?

इस मामले में राधा और बबीता की गिरफ्तारी सबसे अधिक चर्चा में है। पुलिस का आरोप है कि दोनों महिलाओं ने हथियारों को दिल्ली से मुंबई पहुंचाने में मदद की थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, कथित तौर पर उन्हें हथियारों की खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की जिम्मेदारी दी गई थी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों महिलाएं ट्रेन से मुंबई पहुंची थीं। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि उन्हें हथियार ले जाने के लिए किसने तैयार किया, यात्रा की व्यवस्था किसने की और मुंबई पहुंचने के बाद हथियार किस व्यक्ति को सौंपे गए।

पुलिस की जांच में एक नाबालिग के माध्यम से हथियारों की सुपुर्दगी किए जाने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, इस पूरी कड़ी में प्रत्येक व्यक्ति की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

अमृतसर से मुंबई तक हथियार पहुंचाने की कड़ी

जांच से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में अमृतसर से हथियार हासिल करने और फिर उन्हें मुंबई तक पहुंचाने की कड़ी सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि कुणाल ने सुमित की मदद से अमृतसर से एक पिस्तौल और कारतूस प्राप्त किए थे।

इसके बाद कथित तौर पर हथियारों को मुंबई पहुंचाने की व्यवस्था की गई। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग आरोपियों के बीच किस प्रकार समन्वय स्थापित हुआ और क्या उन्हें किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से निर्देश मिल रहे थे।

कुछ रिपोर्टों में हथियारों को पहले से तय स्थान पर छोड़ने और वहां से दूसरे व्यक्ति के माध्यम से आगे पहुंचाने की कथित व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इस तरह की व्यवस्था को लेकर जांच एजेंसियां डिजिटल संवाद, यात्रा से संबंधित जानकारी और आरोपियों के आपसी संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।

कुणाल और सुमित की भूमिका भी जांच के दायरे में

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए कुणाल और सुमित की भूमिका हथियारों की व्यवस्था करने तथा उन्हें आगे पहुंचाने से जुड़ी हो सकती है। जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि हथियार किस स्रोत से मिले और उन्हें फायरिंग करने वाले लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसने संभाली।

कुणाल के कथित संपर्कों और उसके माध्यम से अन्य आरोपियों तक पहुंचने वाली कड़ियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियारों की आपूर्ति के पीछे किसी एक व्यक्ति की भूमिका थी या कई लोग अलग-अलग स्तर पर इस व्यवस्था का हिस्सा थे।

फिलहाल, गिरफ्तार किए गए लोगों पर लगे आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। इसलिए उनकी भूमिका को लेकर सामने आ रही जानकारियों को पुलिस जांच के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

क्या किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से जुड़े हैं आरोपी?

इस मामले में कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों के संपर्कों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्टों में अनिल पंडित नामक व्यक्ति का उल्लेख आया है, जिसके साथ कुछ आरोपियों के कथित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियों को यह पता लगाना है कि हथियारों की व्यवस्था करने और उन्हें मुंबई पहुंचाने के निर्देश कहां से आए थे। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि फायरिंग की घटना को अंजाम देने वालों और हथियार पहुंचाने के आरोपियों के बीच संपर्क स्थापित कराने में किसकी भूमिका थी।

हालांकि, किसी गिरोह या व्यक्ति से संबंध होने के आरोप और अदालत में साबित होने वाले तथ्य अलग-अलग होते हैं। इस मामले में किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकेगा।

पुलिस अब किन बिंदुओं पर कर रही है जांच?

फायरिंग मामले में पुलिस की जांच कई अहम पहलुओं पर केंद्रित है। इनमें हथियारों के स्रोत का पता लगाना, कथित सप्लाई चेन में शामिल लोगों की पहचान करना, आरोपियों के बीच संपर्कों की पुष्टि करना और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों का मिलान करना शामिल है।

इसके अलावा, जांच एजेंसियां यह भी जानना चाहती हैं कि हथियारों को मुंबई पहुंचाने के पीछे क्या योजना थी और क्या इस मामले में अभी अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। डिजिटल साक्ष्यों, यात्रा से जुड़ी जानकारी और पूछताछ के आधार पर पुलिस घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि किसी गंभीर आपराधिक घटना की जांच में केवल मौके पर मौजूद संदिग्धों की पहचान पर्याप्त नहीं होती। हथियारों की आपूर्ति, परिवहन और कथित मददगारों की भूमिका की पड़ताल करना भी जरूरी होता है।

आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में चार गिरफ्तारियों के बाद अब जांच एजेंसियों का ध्यान कथित हथियार आपूर्ति नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाने पर है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हथियारों की व्यवस्था किसने की, उन्हें मुंबई तक पहुंचाने में किन लोगों ने मदद की और घटना के पीछे की साजिश में कौन-कौन शामिल हो सकता है।

आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच से जुड़े अन्य तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल, मामले में सभी आरोपियों की भूमिका की पुष्टि होना बाकी है और अंतिम निर्णय अदालत के अधिकार क्षेत्र में होगा।

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