नई दिल्ली। दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर अब कर्मचारियों की नौकरियों और कंपनियों की कार्ययोजना पर भी दिखाई देने लगा है। माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल ने भी अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का विकल्प पेश किया है। कंपनी ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में चुनिंदा कर्मचारियों को आर्थिक मुआवजे के साथ कंपनी छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले के बाद वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर में कर्मचारियों के भविष्य और एआई के कारण बदलते रोजगार बाजार को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भारी निवेश कर रही है। दूसरी ओर, बढ़ते परिचालन खर्च को नियंत्रित करने और संसाधनों को भविष्य की प्राथमिकताओं के अनुसार व्यवस्थित करने की चुनौती भी कंपनी के सामने है।
पांच देशों में चुनिंदा कर्मचारियों को मिला ऑफर
रॉयटर्स की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने इस साल जून में पांच देशों के कुछ कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक एग्जिट पैकेज का विस्तार किया था। इनमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड शामिल हैं।
कंपनी के प्रवक्ता ने इस कार्यक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में कुछ टीमों ने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना शुरू की थी। इसके बाद जून 2026 में कुछ अन्य देशों में भी इस कार्यक्रम का विस्तार किया गया।
इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के बदले आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। हालांकि, यह सामान्य छंटनी यानी जबरन नौकरी से निकालने की प्रक्रिया नहीं है। कर्मचारियों को प्रस्ताव स्वीकार करने या कंपनी में बने रहने का विकल्प दिया जाता है।
गूगल ने अभी तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि पांचों देशों में कितने कर्मचारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया है। इसलिए इस योजना से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं है।
नौकरी छोड़ने पर कितना मिलेगा पैसा?
गूगल के इस कार्यक्रम में सबसे अधिक जानकारी स्विट्जरलैंड में दिए गए एग्जिट पैकेज को लेकर सामने आई है। वहां कंपनी के कर्मचारियों को उनकी सेवा अवधि के आधार पर आर्थिक मुआवजा देने की पेशकश की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में पात्र कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए प्रत्येक वर्ष के बदले एक महीने के वेतन के बराबर भुगतान दिया गया। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने के वेतन तक रखी गई थी।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी ने गूगल में पांच साल काम किया है तो उसे पांच महीने के वेतन के बराबर मुआवजा मिल सकता है। वहीं, 12 साल या उससे अधिक सेवा देने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए अधिकतम भुगतान 12 महीने के वेतन तक सीमित बताया गया है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि स्विट्जरलैंड में सामने आए मुआवजे के नियमों को बाकी चार देशों पर लागू नहीं माना जा सकता। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और जापान में कर्मचारियों को दिए गए पैकेज की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
स्विट्जरलैंड में कर्मचारियों ने स्वीकार किया प्रस्ताव
गूगल का स्विट्जरलैंड में ज्यूरिख शहर के आसपास एक बड़ा इंजीनियरिंग केंद्र है। यहां कंपनी के लगभग 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जून के मध्य में कर्मचारियों को इस योजना की जानकारी दी गई थी और आवेदन करने वाले कर्मचारियों को जुलाई के मध्य तक निर्णय बता दिया गया था।
जिन कर्मचारियों ने प्रस्ताव स्वीकार किया, उनके कंपनी से बाहर जाने की प्रक्रिया अगस्त से शुरू हो गई थी।
इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि एक टीम में लगभग 50 कर्मचारियों में से कम से कम चार लोगों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया था।
यह आंकड़ा केवल एक टीम से संबंधित जानकारी है। इसे स्विट्जरलैंड या पांचों देशों में योजना स्वीकार करने वाले कुल कर्मचारियों की संख्या नहीं माना जा सकता।
AI और क्लाउड बिजनेस पर गूगल का बढ़ता फोकस
गूगल के इस फैसले के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बढ़ता निवेश माना जा रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में एआई टेक्नोलॉजी ने वैश्विक डिजिटल बाजार का स्वरूप तेजी से बदल दिया है। कंपनियां अपने सर्च इंजन, डिजिटल विज्ञापन, क्लाउड सेवाओं और अन्य उत्पादों में एआई आधारित सुविधाएं शामिल कर रही हैं।
गूगल भी इस प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रहा है। कंपनी के लिए एआई मॉडल का विकास, डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च महत्वपूर्ण हो गया है।
ऐसे में कंपनी अपने कर्मचारियों और वित्तीय संसाधनों को उन विभागों की ओर स्थानांतरित करना चाहती है, जिन्हें भविष्य के कारोबार के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गूगल की वित्त प्रमुख अनात अश्केनाजी भी कंपनी की वित्तीय प्राथमिकताओं में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के महत्व को रेखांकित कर चुकी हैं।
AI और Google Cloud के कर्मचारियों को राहत?
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कंपनी के सभी विभागों के कर्मचारियों को इसका हिस्सा नहीं बनाया गया है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के पिछले स्वैच्छिक एग्जिट कार्यक्रमों में Google Cloud और एआई रिसर्च यूनिट DeepMind के कर्मचारियों को इस तरह के प्रस्तावों से बाहर रखा गया था। स्विट्जरलैंड में भी DeepMind को इस कार्यक्रम से बाहर रखने की जानकारी सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनी अपने कुछ पारंपरिक या पुनर्गठित किए जा रहे विभागों में कर्मचारियों की संख्या और खर्च को व्यवस्थित करना चाहती है, जबकि एआई और क्लाउड जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश और भर्ती को प्राथमिकता दी जा रही है।
हालांकि, सभी पांच देशों में प्रत्येक विभाग की पात्रता को लेकर कंपनी ने विस्तृत सार्वजनिक जानकारी नहीं दी है।
माइक्रोसॉफ्ट के फैसले के बाद टेक सेक्टर में बढ़ी हलचल
गूगल का यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक बायआउट योजना पेश की है।
रिपोर्टों के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट ने लगभग 60,000 कर्मचारियों को ध्यान में रखते हुए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य भी कंपनी के खर्च को नियंत्रित करना और बदलती कारोबारी प्राथमिकताओं के अनुसार कार्यबल को व्यवस्थित करना है।
वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों में इस तरह के फैसले यह संकेत देते हैं कि एआई के दौर में कंपनियों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं। अब केवल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि सही तकनीकी कौशल वाले कर्मचारियों को महत्वपूर्ण परियोजनाओं में लगाना भी प्राथमिकता बन गया है।
क्या भारत में भी गूगल कर्मचारी होंगे प्रभावित?
गूगल के इस फैसले के बाद भारतीय कर्मचारियों के बीच भी यह सवाल उठ सकता है कि क्या भारत में काम करने वाले कर्मचारियों को भी ऐसा प्रस्ताव मिलेगा?
फिलहाल सामने आई इस पांच देशों वाली घोषणा में भारत का नाम शामिल नहीं है। कंपनी ने जिन देशों में जून 2026 में इस कार्यक्रम का विस्तार करने की पुष्टि की है, उनमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड शामिल हैं।
इसलिए अभी भारत में गूगल कर्मचारियों के लिए इसी योजना के लागू होने की कोई पुष्टि नहीं है। भविष्य में कंपनी की ओर से कोई नया निर्णय लिया जाता है तो स्थिति बदल सकती है।
AI की दौड़ में बदल रहा है रोजगार का भविष्य
गूगल का स्वैच्छिक एग्जिट ऑफर केवल कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का आर्थिक विकल्प देने तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक तकनीकी उद्योग में हो रहे बड़े बदलावों की ओर भी इशारा करता है।
एआई के विकास के साथ कंपनियों को नए प्रकार के विशेषज्ञों की जरूरत पड़ रही है। मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और एआई इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों का महत्व बढ़ रहा है।
वहीं, जिन विभागों में काम करने के तरीके बदल रहे हैं, वहां कंपनियां संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा कर रही हैं।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि एआई के कारण सभी पारंपरिक नौकरियां समाप्त हो जाएंगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि आने वाले समय में तकनीकी कौशल, नई तकनीक सीखने की क्षमता और बदलते कार्य वातावरण के अनुसार खुद को तैयार रखना कर्मचारियों के लिए पहले से अधिक जरूरी होगा।
निष्कर्ष: गूगल का पांच देशों में स्वैच्छिक एग्जिट पैकेज पेश करना वैश्विक टेक सेक्टर के बदलते रुख को दर्शाता है। कंपनी एक तरफ एआई और क्लाउड बिजनेस में निवेश बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर अपने खर्च और कर्मचारियों की संरचना को नई प्राथमिकताओं के अनुसार व्यवस्थित कर रही है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी इसी तरह के कदम उठाती हैं या नहीं।