नई दिल्ली। देश में हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन Qdenga (क्यूडेंगा) को मंजूरी दे दी है। यह वैक्सीन जापान की प्रतिष्ठित दवा कंपनी Takeda Pharmaceutical द्वारा विकसित की गई है और अब भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए एक बड़ा हथियार मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंजूरी ऐसे समय पर मिली है, जब देश में हर साल मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिलती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ डेंगू का बोझ सबसे अधिक है। ऐसे में इस वैक्सीन से लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बारिश के मौसम में बढ़ता है डेंगू का खतरा
मानसून शुरू होते ही जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है। एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलने वाला डेंगू हर वर्ष हजारों लोगों को अस्पताल पहुंचा देता है। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की मौत भी हो जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू केवल बुखार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि गंभीर स्थिति में यह डेंगू हेमोरेजिक फीवर (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) जैसी जानलेवा जटिलताओं का कारण बन सकता है।
क्या है Qdenga वैक्सीन?
Qdenga एक आधुनिक डेंगू वैक्सीन है जिसे जापान की Takeda Pharmaceutical ने विकसित किया है। यह वैक्सीन डेंगू वायरस के चारों प्रमुख प्रकार (Serotypes) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
यह वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है ताकि यदि भविष्य में डेंगू वायरस शरीर में प्रवेश करे तो प्रतिरक्षा तंत्र तेजी से प्रतिक्रिया देकर संक्रमण को गंभीर होने से रोक सके।
43 देशों में पहले से हो रहा इस्तेमाल
Qdenga वैक्सीन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की भी मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में इसका उपयोग दुनिया के 43 से अधिक देशों में किया जा रहा है। वर्ष 2022 में लॉन्च होने के बाद अब तक दुनियाभर में 3.2 करोड़ से अधिक लोगों को यह वैक्सीन दी जा चुकी है।
भारत में मंजूरी मिलने के बाद अब इसके चरणबद्ध उपयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे देश के स्वास्थ्य तंत्र को डेंगू से निपटने में बड़ी सहायता मिलने की उम्मीद है।
कैसे काम करती है यह वैक्सीन?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन लगाने के बाद शरीर डेंगू वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करता है। यदि भविष्य में व्यक्ति डेंगू वायरस से संक्रमित होता है तो शरीर पहले से तैयार प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद से वायरस से मुकाबला करता है।
इससे संक्रमण गंभीर होने, अस्पताल में भर्ती होने और जानलेवा जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
किसे मिल सकता है सबसे अधिक लाभ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हर वर्ष डेंगू के मामले अधिक आते हैं, वहां रहने वाले लोगों को इस वैक्सीन से विशेष लाभ मिल सकता है। हालांकि भारत में इसके उपयोग से संबंधित अंतिम दिशा-निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित विशेषज्ञ समितियां जारी करेंगी।
भारत में क्यों जरूरी थी डेंगू वैक्सीन?
भारत में हर वर्ष लाखों लोग डेंगू की चपेट में आते हैं। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक यह बीमारी तेजी से फैलती है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इलाज के भरोसे डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। रोकथाम, जागरूकता, साफ-सफाई और टीकाकरण जैसे उपाय ही इस बीमारी के प्रभाव को कम कर सकते हैं।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वैक्सीन के साथ-साथ बचाव के सामान्य उपाय भी अपनाना जरूरी है।
डेंगू वैक्सीन को मंजूरी मिलना भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैक्सीन का प्रभावी तरीके से उपयोग किया गया तो आने वाले वर्षों में डेंगू के गंभीर मामलों और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन मच्छरों पर नियंत्रण, स्वच्छता और समय पर उपचार जैसे उपायों की आवश्यकता पहले की तरह बनी रहेगी।