नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों लिवर की सेहत को लेकर एक दावा चर्चा में है। वायरल पोस्ट में वजन और लंबाई के आधार पर यह समझने की बात कही जा रही है कि किसी व्यक्ति का लिवर स्वस्थ है या उसमें बीमारी का खतरा है। यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लिवर से जुड़ी कई समस्याएं शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। हालांकि, केवल वजन और लंबाई देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति का लिवर बीमार है या पूरी तरह स्वस्थ। वजन और लंबाई से निकला BMI (Body Mass Index) तथा कमर के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी लिवर की सेहत से जुड़े जोखिम को समझने में जरूर मदद कर सकते हैं।
वजन और लंबाई का लिवर से क्या संबंध है?
वजन और लंबाई से BMI निकाला जाता है। BMI शरीर के वजन और लंबाई के बीच अनुपात को समझने का एक सामान्य तरीका है। अधिक वजन, खासकर पेट और कमर के आसपास अतिरिक्त चर्बी, मेटाबॉलिक समस्याओं के साथ फैटी लिवर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी हो सकती है।
मेडिकल भाषा में फैटी लिवर की स्थिति को अब MASLD (Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease) कहा जाता है। इसमें लिवर में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है और कुछ लोगों में समय के साथ सूजन तथा लिवर में स्कारिंग यानी फाइब्रोसिस की समस्या विकसित हो सकती है।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति का वजन बढ़ रहा है, कमर का घेरा बढ़ा हुआ है, शारीरिक गतिविधि कम है या साथ में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर अथवा कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो लिवर की सेहत पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है।
क्या सिर्फ BMI से लिवर की बीमारी पता चल सकती है?
इसका जवाब है—नहीं। BMI केवल एक सामान्य स्वास्थ्य संकेतक है। इससे यह पुष्टि नहीं होती कि लिवर में फैट है, सूजन है या फाइब्रोसिस मौजूद है।
कई लोगों में फैटी लिवर के बावजूद शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण केवल शरीर का वजन सामान्य होने से भी यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि लिवर में कोई समस्या नहीं है। दूसरी ओर, अधिक वजन वाले हर व्यक्ति को फैटी लिवर हो, यह भी जरूरी नहीं है।
यानी वायरल पोस्ट में वजन और लंबाई को लेकर बताई गई जानकारी को जोखिम समझने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे बीमारी की जांच या अंतिम निदान नहीं माना जाना चाहिए।
पेट की चर्बी क्यों मानी जाती है महत्वपूर्ण?
लिवर की सेहत पर चर्चा करते समय केवल शरीर के कुल वजन के बजाय शरीर में फैट कहां जमा है, यह भी महत्वपूर्ण हो सकता है। पेट और कमर के आसपास अधिक चर्बी मेटाबॉलिक जोखिम से जुड़ी होती है। NHS के अनुसार अधिक वजन, विशेषकर पेट और कमर के आसपास फैट, फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियां भी MASLD से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए लिवर की सेहत को समझने के लिए डॉक्टर व्यक्ति के वजन, कमर, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य मेटाबॉलिक जोखिमों को एक साथ देखते हैं।
लिवर की समस्या में कौन से लक्षण दिख सकते हैं?
फैटी लिवर के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। कुछ लोगों को थकान, अस्वस्थ महसूस होना या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में हल्की असहजता महसूस हो सकती है। लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर भी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
बीमारी बढ़ने पर पीलिया, पेट या पैरों में सूजन, गहरे रंग का पेशाब और अन्य गंभीर संकेत दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
लिवर की जांच कैसे होती है?
अगर डॉक्टर को लिवर की समस्या का संदेह होता है तो स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट कराए जा सकते हैं। लिवर फंक्शन से जुड़े रक्त परीक्षणों के साथ जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच से लिवर में फैट की मौजूदगी का आकलन किया जा सकता है। कुछ मामलों में FibroScan जैसी जांच लिवर में संभावित फाइब्रोसिस यानी स्कारिंग के आकलन में मदद करती है।
इसलिए सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी एक फॉर्मूले या चार्ट के आधार पर स्वयं बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
वजन कम करने से लिवर को मिल सकता है फायदा
अगर किसी व्यक्ति में अधिक वजन के साथ फैटी लिवर या MASLD की समस्या है, तो चिकित्सकीय सलाह के तहत वजन कम करना लिवर की सेहत में सुधार से जुड़ा हो सकता है। अमेरिकन Association for the Study of Liver Diseases (AASLD) के अनुसार शरीर के वजन में लगभग 5 से 10 प्रतिशत की कमी लिवर में फैट, सूजन और फाइब्रोसिस जैसे संकेतकों में सुधार से जुड़ी है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को तेजी से वजन घटाना चाहिए। वजन कम करने का लक्ष्य व्यक्ति की उम्र, वर्तमान वजन, अन्य बीमारियों और चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
खानपान और व्यायाम पर भी दें ध्यान
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। AASLD की सामग्री में सब्जियों, फलों, दालों, नट्स, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों पर आधारित आहार तथा नियमित व्यायाम पर जोर दिया गया है।
बहुत अधिक कैलोरी वाले भोजन, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अत्यधिक मीठे पेय का सेवन कम करना भी वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
वायरल दावे को समझने का सही तरीका
वजन और लंबाई से निकला BMI लिवर की बीमारी का प्रमाण नहीं है। यह केवल शरीर के वजन से जुड़े जोखिम को समझने का एक साधारण संकेतक है। लिवर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, रक्त परीक्षण और इमेजिंग रिपोर्ट को देखते हैं।
इसलिए यदि किसी व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ रहा है, कमर का आकार बढ़ गया है, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है अथवा पहले से लिवर की जांच असामान्य आई है, तो चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है। सोशल मीडिया के किसी चार्ट या वायरल वीडियो को मेडिकल डायग्नोसिस का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी व्यक्ति को लिवर की बीमारी है या नहीं, इसका निर्णय डॉक्टर की जांच और आवश्यक मेडिकल टेस्ट के आधार पर ही किया जाना चाहिए।