नई दिल्ली। देश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मध्य प्रदेश के कुछ बी.एड. (B.Ed.) कॉलेजों में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने सख्त रुख अपनाया है। परिषद ने इन संस्थानों की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति को पांच कार्य दिवस के भीतर विस्तृत फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई को शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच का दायरा मध्य प्रदेश के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय से संबद्ध चार बी.एड. कॉलेजों तक सीमित है, जहां निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कॉलेज अपने पंजीकृत पते पर संचालित ही नहीं हो रहे थे, जबकि कई संस्थानों में बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं का भी अभाव पाया गया।
पांच सदस्यीय समिति करेगी विस्तृत जांच
एनसीटीई द्वारा गठित समिति में शिक्षा क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति का नेतृत्व सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एच.सी.एस. राठौर को सौंपा गया है। समिति संबंधित कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण करेगी और सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच करेगी। इसके अलावा वीडियो और फोटोग्राफिक साक्ष्यों के माध्यम से भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और प्रमाण आधारित हो।
समिति को यह भी देखना होगा कि संबंधित संस्थान एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। यदि किसी कॉलेज में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शुरुआती जांच में सामने आईं कई खामियां
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर जिन अनियमितताओं की जानकारी मिली है, उनमें कई कॉलेजों का निर्धारित पते पर मौजूद नहीं होना सबसे गंभीर मामला है। इसके अलावा कई संस्थानों में पर्याप्त कक्षाएं, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, प्रशिक्षित शिक्षक तथा अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं पाए गए। ऐसे मामलों ने शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई संस्थान केवल कागजों पर संचालित हो रहा है और वहां वास्तविक शैक्षणिक गतिविधियां नहीं हो रही हैं, तो इसका सीधा असर भविष्य के शिक्षकों की गुणवत्ता पर पड़ता है। यही कारण है कि एनसीटीई ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं।
शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष जोर
देशभर में बी.एड. पाठ्यक्रम के माध्यम से हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षक बनने का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। ऐसे में यदि प्रशिक्षण संस्थानों में ही अनियमितताएं हों, तो शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल भवन और मान्यता पर्याप्त नहीं है, बल्कि योग्य संकाय, आधुनिक शिक्षण संसाधन, नियमित कक्षाएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण भी अनिवार्य हैं। इन्हीं मानकों के आधार पर एनसीटीई समय-समय पर निरीक्षण करती है।
रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
एनसीटीई ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी संस्थान द्वारा नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो उसकी मान्यता रद्द करने, प्रवेश पर रोक लगाने या अन्य दंडात्मक कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल चार कॉलेजों तक सीमित नहीं रह सकती। यदि जांच में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां सामने आती हैं तो अन्य राज्यों के संस्थानों की भी समीक्षा की जा सकती है।
छात्रों के हितों का भी रखा जाएगा ध्यान
बी.एड. कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जांच प्रक्रिया के दौरान छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी संस्थान के खिलाफ कार्रवाई होती है तो संबंधित छात्रों के शैक्षणिक हितों की सुरक्षा के लिए भी उचित व्यवस्था की जा सकती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोषी संस्थानों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य भी सुरक्षित रहना चाहिए। इसलिए जांच के बाद लिए जाने वाले निर्णयों में दोनों पहलुओं का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
हाल के वर्षों में उच्च शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार पर लगातार जोर दिया जा रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित निरीक्षण और मानकों के कड़ाई से पालन के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
एनसीटीई की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इससे न केवल फर्जी या नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर अंकुश लगेगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।
मध्य प्रदेश के बी.एड. कॉलेजों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एनसीटीई द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। शिक्षा जगत का मानना है कि इस पहल से शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता बढ़ेगी, फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और देश में शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता को नई मजबूती मिलेगी।