नई दिल्ली : मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में, दिल्ली सरकार एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। आईआईटी दिल्ली के नेतृत्व में एक एडवांस्ड, रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने की तैयारी है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों की टीम ने यह विस्तृत प्रस्ताव रखा, जिसमें दिल्ली के एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए साइंस-बेस्ड रोडमैप दिया गया। इस संदर्भ में, यह प्रस्ताव पिछले सरकार के दौरान लंबे समय तक पेंडिंग रहा और बाद में फाइलों में बंद हो गया था। जबकि आईआईटीएम पहले से PM2.5 पर काम कर रहा है, एक्शन प्लान के तहत PM10 पर भी फोकस करने का कमिटमेंट किया गया था। इसी दिशा में दिल्ली सरकार के एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी और IIT दिल्ली के बीच हुई बैठक में इस स्टडी को आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया है। माननीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार के अप्रूवल की प्रक्रिया को तेज़ किया जाए, ताकि स्टडी जल्द से जल्द शुरू हो सके। यह प्रस्तावित स्टडी पांच साल की अवधि की होगी और इसका उद्देश्य केवल पुराने डेटा पर आधारित विश्लेषण से आगे बढ़कर एयर पॉल्यूशन के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान करना है, खासकर PM10 के लिए। इससे पॉलिसी मेकर्स को पीक पॉल्यूशन के समय तुरंत निर्णय लेने और लंबे समय में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों का आकलन करने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट की एक प्रमुख विशेषता डीपीसीसी सुपर-साइट को फिर से चालू करना है, जिसे एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंट्स और मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स से जोड़ा जाएगा। इससे एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार होगा जो लगातार हाई-रिज़ोल्यूशन डेटा उपलब्ध कराएगा।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एयर क्वालिटी सुधार दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है, और यह प्रस्तावित स्टडी इस दिशा में एक मजबूत साइंटिफिक सपोर्ट देगी,” पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा। “यह स्टडी सरकार को यह समझने में मदद करेगी कि पॉल्यूशन का सोर्स क्या है, कौन से फैक्टर्स इसे बढ़ा रहे हैं, और कौन से कदम ग्राउंड पर असर दिखा रहे हैं,” उन्होंने आगे कहा।
स्टडी की प्रमुख विशेषताएं
यह स्टडी डीपीसीसी स्टाफ के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग का भी हिस्सा होगी, जिसमें इंस्ट्रूमेंट ऑपरेशन, डेटा एनालिसिस, मॉडलिंग और केमिकल कैरेक्टराइजेशन पर ट्रेनिंग दी जाएगी।यह प्रोजेक्ट पांच साल में सभी प्रमुख हॉटस्पॉट्स को कवर करेगा, जहां हर हॉटस्पॉट पर कम से कम 30 दिनों का सीज़नल सैंपलिंग किया जाएगा और सुपर-साइट पर लगातार मॉनिटरिंग होगी। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल दिल्ली को पॉल्यूशन स्रोतों की सटीक पहचान, पॉलिसी के असर का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति के लिए मजबूत डेटा बेस तैयार करने में मदद करेगी। “दिल्ली की पॉल्यूशन के खिलाफ लड़ाई साइंस, डेटा और जवाबदेही पर आधारित होनी चाहिए,” माननीय मंत्री ने कहा। “यह स्टडी हमें बताएगी कि पॉल्यूशन कहां से आ रहा है, और कौन से कदम वास्तव में असर डाल रहे हैं।”