स्वास्थ्य : अमेरिका में डेयरी गाय के संपर्क से H5N1 संक्रमण का मामला सामने आने की खबर ने बर्ड फ्लू को लेकर चिंता बढ़ा दी है। क्या यह वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है, इसके लक्षण क्या हैं और आम लोगों को कितनी सावधानी बरतनी चाहिए? जानिए पूरी जानकारी।
अमेरिका में बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लुएंजा को लेकर चिंता का एक अहम कारण यह है कि H5N1 वायरस केवल पक्षियों तक सीमित नहीं रहा है। कुछ परिस्थितियों में यह स्तनधारी जानवरों को भी संक्रमित कर सकता है। डेयरी गायों में संक्रमण की घटनाओं और संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले लोगों में सामने आए मामलों ने वैज्ञानिकों तथा स्वास्थ्य एजेंसियों का ध्यान इस ओर खींचा है।
हालांकि, किसी व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि होने का अर्थ यह नहीं है कि वायरस आम आबादी में तेजी से फैलने लगा है। संक्रमण का स्रोत, संपर्क का प्रकार और वायरस के इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता जैसे पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है। किसी विशेष व्यक्ति या हालिया मामले की स्थिति जानने के लिए संबंधित स्वास्थ्य एजेंसी की आधिकारिक जानकारी देखना आवश्यक है।
H5N1 इन्फ्लुएंजा वायरस मुख्य रूप से पक्षियों में फैलने वाला वायरस है, लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों में गायों सहित कई स्तनधारी जानवरों में भी इसके संक्रमण की पुष्टि हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, संक्रमित जानवरों के निकट संपर्क या उनके संपर्क में आई दूषित वस्तुओं और वातावरण के जरिए मनुष्यों में संक्रमण हो सकता है। संक्रमित डेयरी गायों के सीधे संपर्क में आए कुछ लोगों में भी संक्रमण दर्ज किया गया है।
यह संक्रमण विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म या पशुपालन से जुड़े कार्य करते हैं। संक्रमित पशुओं का दूध निकालने, उनकी देखभाल करने और दूषित स्थानों की सफाई के दौरान वायरस के संपर्क में आने का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार H5N1 वायरस मनुष्यों के बीच आसानी से नहीं फैलता है। लगातार और व्यापक स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण फैलने के प्रमाण नहीं मिले हैं। इसलिए इसे लेकर जागरूक रहना जरूरी है, लेकिन बिना प्रमाण के महामारी जैसी स्थिति का दावा करना उचित नहीं होगा।
अमेरिका में वर्ष 2024 के दौरान डेयरी गायों में H5N1 संक्रमण सामने आने के बाद पशु स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई थी। इसके बाद संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले कुछ कर्मचारियों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई।
इस घटनाक्रम ने वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल रखा कि क्या वायरस अलग-अलग स्तनधारी प्रजातियों में फैलने के दौरान अपने व्यवहार में बदलाव कर सकता है। वायरस में होने वाले आनुवंशिक परिवर्तन उसकी संक्रमण क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण संक्रमित पशुओं की निगरानी, वायरस के नमूनों की जांच और संक्रमण के मामलों की समय पर पहचान महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) की 15 अक्टूबर 2026 को अद्यतन जानकारी के अनुसार, वहां जंगली पक्षियों, पोल्ट्री और डेयरी गायों में H5 वायरस की गतिविधि बनी हुई है। एजेंसी ने आम जनता के लिए वर्तमान जोखिम को कम बताया है, जबकि संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले लोगों की निगरानी जारी रखने की बात कही है।
H5N1 संक्रमण के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
* बुखार और शरीर में दर्द।
* खांसी, गले में खराश और थकान।
* सांस लेने में परेशानी।
* आंखों में लालिमा या कंजंक्टिवाइटिस।
* मांसपेशियों में दर्द और अस्वस्थ महसूस होना।
* गंभीर मामलों में फेफड़ों से जुड़ी परेशानी और तंत्रिका तंत्र संबंधी लक्षण।
संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने के बाद इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर को पशुओं, कच्चे दूध या संभावित संक्रमित वातावरण के संपर्क की जानकारी भी देनी चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर H5N1 संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती; इसके लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और आवश्यक प्रयोगशाला जांच की जरूरत होती है।
डेयरी गायों में H5N1 संक्रमण की चर्चा के बीच दूध की सुरक्षा एक अहम विषय बन गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, संक्रमित गायों के कच्चे दूध में वायरस पाया गया है। इसलिए बिना उबाले या बिना पाश्चुरीकरण वाला दूध पीने से बचना चाहिए।
पाश्चुरीकरण की प्रक्रिया दूध को निर्धारित तापमान पर गर्म करके हानिकारक रोगाणुओं को निष्क्रिय करने में मदद करती है। उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, व्यावसायिक पाश्चुरीकरण H5N1 वायरस को निष्क्रिय करने में प्रभावी है।
उपभोक्ताओं को निम्नलिखित सावधानियां अपनानी चाहिए:
* पाश्चुरीकृत दूध का ही सेवन करें।
* कच्चे दूध को सीधे पीने से बचें।
* यदि पाश्चुरीकृत दूध उपलब्ध नहीं है, तो कच्चे दूध को अच्छी तरह उबालकर ही इस्तेमाल करें।
* अंडे, चिकन और अन्य मांसाहारी खाद्य पदार्थों को पूरी तरह पकाकर खाएं।
* बीमार या अचानक मृत पशुओं का दूध अथवा मांस इस्तेमाल न करें।
इन उपायों का उद्देश्य केवल H5N1 ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों से फैलने वाले अन्य संक्रमणों का जोखिम भी कम करना है।
भारत में लोगों को घबराने के बजाय स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की आधिकारिक सलाह पर ध्यान देना चाहिए। विशेष रूप से पशुपालकों, डेयरी कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों और पोल्ट्री फार्म में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि किसी क्षेत्र में पशुओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि होती है, तो बीमार या मृत पक्षियों और पशुओं को नंगे हाथों से छूने से बचना चाहिए। ऐसे मामलों की सूचना स्थानीय पशुपालन विभाग या संबंधित प्रशासन को देनी चाहिए। संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले कर्मचारियों को उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए।
हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करना, दूषित सतहों से बचना तथा पशुओं के रहने वाले स्थानों की सफाई निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार करना भी जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति का संभावित संक्रमित पशु से संपर्क हुआ है और उसके बाद बुखार, आंखों में लालिमा या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
H5N1 वायरस की निगरानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ आनुवंशिक बदलाव कर सकते हैं। यदि भविष्य में कोई वायरस ऐसा बदलाव हासिल कर ले, जिससे वह मनुष्यों के बीच आसानी से और लगातार फैलने लगे, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती उत्पन्न हो सकती है।
हालांकि, भविष्य में ऐसा होगा या नहीं, इसकी निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्तमान में निगरानी में शामिल जूनोटिक इन्फ्लुएंजा वायरसों में लगातार मानव-से-मानव संचरण स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए संभावित खतरे और वर्तमान जोखिम के बीच अंतर समझना आवश्यक है।
डेयरी गायों में H5N1 संक्रमण का पाया जाना यह बताता है कि पशुओं और मनुष्यों के स्वास्थ्य की निगरानी को एक साथ मजबूत करना जरूरी है। संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क और कच्चे दूध के सेवन से बचाव करना फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में शामिल है।
आम लोगों को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों के बजाय WHO, CDC और भारत के स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करना चाहिए। समय पर पहचान, सुरक्षित खाद्य पदार्थों का सेवन और जिम्मेदार व्यवहार संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।