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DA भुगतान विवाद गरमाया: हिमाचल  हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब और तेज हो गई है।  अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली […]

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  • May 1, 2026 6:02 pm IST, Published 1 hour ago

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब और तेज हो गई है।  अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 जून को निर्धारित की गई है।यह याचिका उन सरकारी कर्मचारियों की ओर से दायर की गई है, जिनका कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार की तुलना में कम महंगाई भत्ता दिया जा रहा है और कई किस्तें लंबे समय से लंबित हैं। जस्टिस जियालाल भारद्वाज की बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

कर्मचारियों की दलीलें और बढ़ता विवाद

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को वर्तमान में 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार अपने कर्मचारियों को केवल 45 प्रतिशत DA का भुगतान कर रही है। यह अंतर 15 प्रतिशत का है, जिसे कर्मचारियों ने अनुचित बताया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि महंगाई भत्ता वेतन संरचना का अहम हिस्सा होता है, जिसका उद्देश्य बढ़ती महंगाई के प्रभाव को संतुलित करना है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा समय पर भुगतान न किए जाने से कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।कर्मचारियों का यह भी कहना है कि हिमाचल प्रदेश का अपना अलग वेतन आयोग नहीं है और राज्य आमतौर पर केंद्र सरकार या पंजाब पैटर्न का अनुसरण करता है। ऐसे में उनकी मांग है कि 1 जुलाई 2024 से रुकी हुई सभी DA किस्तों को केंद्र सरकार के अनुरूप तत्काल जारी किया जाए।

लाखों कर्मचारियों की नजर कोर्ट पर

राज्य में करीब 2.25 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी इस विवाद से प्रभावित हैं। इन कर्मचारियों का न केवल महंगाई भत्ता बकाया है, बल्कि बड़ी मात्रा में एरियर भी लंबे समय से लंबित बताया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों ने कई बार प्रदर्शन और आंदोलन के जरिए अपनी मांगें उठाई हैं, लेकिन सरकार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए भुगतान में देरी की बात कही है। इसी मुद्दे पर एक अन्य संबंधित मामले की भी सुनवाई 28 मई को होनी है, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कर्मचारियों में उम्मीद जगी है कि उन्हें बकाया भुगतान को लेकर राहत मिल सकती है।

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