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जनता की सेवा के लिए हैं अधिकारी, दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं: फारूक अब्दुल्ला

इसी दौरान फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन प्रदर्शनों को सकारात्मक बताते हुए कहा कि तानाशाही जैसी कार्यशैली के खिलाफ एक नई लहर दिखाई दे रही है। उनकी टिप्पणी में लोकतांत्रिक व्यवस्था, असहमति और विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।

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  • October 16, 2026 7:00 pm IST, Published 3 minutes ago

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में एक आईएएस अधिकारी पर महिला जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने इस घटना की आलोचना करते हुए संबंधित अधिकारी के व्यवहार को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों से जनता की समस्याएं सुनने और शिकायतों का समाधान करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन किसी शिकायतकर्ता के साथ इस तरह का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि अधिकारियों को अपने पद की जिम्मेदारियों और पेशेवर मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकारी कार्यालयों में अपनी समस्याएं लेकर पहुंचने वाले लोगों की बात सुनना प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी ने महिला अधिकारी के साथ बातचीत के दौरान उन्हें बाहर जाने के लिए कहा और कथित तौर पर ऊंची आवाज में बात की। अब्दुल्ला ने इस व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों से जनता के प्रति सम्मानजनक रवैये की उम्मीद की जाती है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने मांग की कि संबंधित अधिकारी को फटकार लगाई जानी चाहिए और उन्हें जम्मू-कश्मीर से हटाने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे पदों पर बैठे लोगों को अपने आचरण के जरिए जिम्मेदारी और संवेदनशीलता प्रदर्शित करनी चाहिए। उनके अनुसार, किसी अधिकारी का काम लोगों की शिकायतों को सुनना और उनकी परेशानियां दूर करने की दिशा में काम करना है, न कि उनके साथ कठोर या अपमानजनक व्यवहार करना।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि प्रशासन में कार्यरत अधिकारियों और मंत्रियों की प्राथमिक जिम्मेदारी आम नागरिकों की सेवा करना है। उन्होंने इस घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर देखने का उल्लेख करते हुए निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि सार्वजनिक जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके कार्यकाल में ऐसी घटना सामने आती, तो वह संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते।

इस मामले में फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब सरकारी अधिकारियों के आचरण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, घटना के पूरे संदर्भ, संबंधित अधिकारियों के पक्ष और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही मामले की विस्तृत स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से संबंधित अधिकारी के कथित व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।

इसी दौरान फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन प्रदर्शनों को सकारात्मक बताते हुए कहा कि तानाशाही जैसी कार्यशैली के खिलाफ एक नई लहर दिखाई दे रही है। उनकी टिप्पणी में लोकतांत्रिक व्यवस्था, असहमति और विरोध प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। अब्दुल्ला ने दिल्ली के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए हिटलर जैसी कार्यशैली के खिलाफ उठ रही आवाजों की बात कही। उनका बयान मौजूदा राजनीतिक माहौल में विरोध प्रदर्शनों की भूमिका और सत्ता के कामकाज को लेकर उनकी राय को दर्शाता है। हालांकि, उनके इस बयान के संदर्भ में प्रदर्शन के आयोजकों, उनकी मांगों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

जम्मू-कश्मीर में महिला अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार और दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों पर फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणियों ने प्रशासनिक जवाबदेही तथा लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे। किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

 

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