गैस की दवा लंबे समय तक लेना किडनी के लिए कितना खतरनाक?

लंबे समय तक गैस और एसिडिटी की दवा लेना कितना सुरक्षित है? जानिए PPI दवाओं के संभावित दुष्प्रभाव, किडनी से जुड़े संकेत और बचाव के जरूरी उपाय।

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  • October 14, 2026 9:00 pm IST, Published 52 minutes ago

स्वास्थ्य : बार-बार होने वाली एसिडिटी, सीने में जलन और पेट में गैस की समस्या से राहत पाने के लिए कई लोग लंबे समय तक दवाओं का सेवन करते रहते हैं। शुरुआत में ये दवाएं आराम पहुंचाती हैं, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के लगातार इनका इस्तेमाल करना सही नहीं माना जाता। कुछ दवाओं के लंबे समय तक सेवन से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। खासतौर पर किडनी और अन्य अंगों की सेहत को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।

आपके साझा किए गए समाचार के आधार पर नीचे समाचार पोर्टल के लिए मौलिक, तथ्यपरक और SEO-अनुकूल लेख तैयार किया गया है। इसमें किसी दवा को लेकर अनावश्यक डर पैदा करने के बजाय उसके सुरक्षित इस्तेमाल और चिकित्सकीय सलाह पर जोर दिया गया है।

क्या लंबे समय तक गैस की दवा लेने से किडनी खराब हो सकती है?

गैस और एसिडिटी की समस्या आम है, लेकिन जब यह परेशानी बार-बार होने लगे तो लोग बिना जांच कराए ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। कुछ लोग भोजन के बाद, कुछ सुबह खाली पेट और कुछ रात में सोने से पहले गैस की दवा लेते हैं। परेशानी कम होने पर भी दवा का सेवन कई सप्ताह या महीनों तक जारी रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एसिडिटी की समस्या को नजरअंदाज करना और बिना जरूरत लंबे समय तक दवा लेना, दोनों ही उचित नहीं हैं। हालांकि, यह मानना भी गलत होगा कि गैस की हर दवा किडनी को नुकसान पहुंचाती है। दवा का प्रकार, उसकी खुराक, सेवन की अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति इसके जोखिम को प्रभावित करते हैं।

गैस की दवाएं कैसे करती हैं काम?

एसिडिटी और सीने में जलन के उपचार के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें एंटासिड, एच-2 रिसेप्टर ब्लॉकर और प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (PPI) प्रमुख हैं।

प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर श्रेणी की दवाएं पेट में एसिड का उत्पादन कम करती हैं। ओमेप्राजोल, पैंटोप्राजोल, एसोमेप्राजोल और रैबेप्राजोल इसी श्रेणी के उदाहरण हैं। डॉक्टर इन दवाओं का इस्तेमाल एसिड रिफ्लक्स, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) और कुछ प्रकार के अल्सर के इलाज में करते हैं।

इन दवाओं से कई मरीजों को प्रभावी राहत मिलती है और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर इन्हें लंबे समय तक लेने की सलाह भी दे सकते हैं। इसलिए केवल लंबे समय तक दवा लेने के आधार पर उसे नुकसानदायक नहीं कहा जा सकता। जरूरी यह है कि दवा का इस्तेमाल सही कारण और उचित चिकित्सकीय निगरानी में हो।

क्या गैस की दवा से किडनी को हो सकता है नुकसान?

कुछ मामलों में एसिडिटी की दवाओं और किडनी संबंधी समस्याओं के बीच संबंध पाया गया है। विशेष रूप से PPI श्रेणी की दवाओं के इस्तेमाल के दौरान एक दुर्लभ समस्या एक्यूट इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस हो सकती है। यह किडनी के ऊतकों में सूजन से जुड़ी स्थिति है, जो उसकी कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।

भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने वर्ष 2019 में PPI दवाओं से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की समीक्षा के संदर्भ में एक्यूट किडनी इंजरी को लेकर सूचना जारी की थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि इन दवाओं के संभावित जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इन दवाओं का सेवन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की किडनी खराब हो जाएगी। दवा के उपयोग और किडनी की बीमारी के बीच संबंध पर शोध जारी है। किसी व्यक्ति में समस्या होने पर उसकी दूसरी बीमारियों, अन्य दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

कुछ लोगों को गैस और एसिडिटी की दवाएं लेते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें शामिल हैं:

* पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित लोग।

* बुजुर्ग व्यक्ति, जिन्हें एक साथ कई दवाएं लेनी पड़ती हैं।

* ऐसे मरीज जो लंबे समय से एसिडिटी की दवा ले रहे हैं, लेकिन उनकी नियमित समीक्षा नहीं हुई है।

* ऐसे लोग जो बिना चिकित्सकीय सलाह के कई तरह की दवाओं का एक साथ सेवन करते हैं।

* ऐसे मरीज जिन्हें दवा लेने के बाद पेशाब में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देते हैं।

इन परिस्थितियों में डॉक्टर को दवा का नाम, उसकी खुराक और सेवन की अवधि बताना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक किडनी की कार्यक्षमता की जांच के लिए रक्त में क्रिएटिनिन जैसे परीक्षण और अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

किडनी खराब होने के कौन-से संकेतों पर दें ध्यान?

किडनी की समस्या के शुरुआती चरण में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की स्थिति का पता लगाना संभव नहीं है। फिर भी कुछ बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन संकेतों पर विशेष ध्यान दें:

* पेशाब की मात्रा में अचानक कमी आना।

* पेशाब में खून दिखाई देना।

* पैरों, टखनों या चेहरे पर असामान्य सूजन होना।

* लगातार मतली, कमजोरी या अस्वस्थता महसूस होना।

* बिना स्पष्ट कारण शरीर में सूजन या अन्य असामान्य बदलाव होना।

यदि पेशाब अचानक बहुत कम हो जाए या उसमें खून दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। ये लक्षण केवल दवा के दुष्प्रभाव के कारण ही नहीं, बल्कि दूसरी गंभीर समस्याओं से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में स्वयं दवा बंद करने या दूसरी दवा शुरू करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

बार-बार एसिडिटी होने पर क्या करें?

अगर आपको सप्ताह में कई बार गैस, खट्टी डकार, सीने में जलन या भोजन के बाद भारीपन महसूस होता है, तो केवल दवा लेकर लक्षण दबाने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

एसिडिटी के पीछे खानपान, मोटापा, भोजन के तुरंत बाद लेटना, कुछ दवाएं या GERD जैसी बीमारी हो सकती है। सही कारण जानने के बाद ही उपचार की उचित योजना बनाई जा सकती है।

परेशानी कम करने के लिए कुछ आदतों में बदलाव मददगार हो सकता है:

1\. भोजन और सोने के बीच अंतर रखें: रात में भोजन करने के तुरंत बाद न लेटें। सोने से लगभग दो से तीन घंटे पहले भोजन कर लेना एसिड रिफ्लक्स के लक्षण कम करने में मदद कर सकता है।

2\. भोजन की मात्रा पर ध्यान दें: एक बार में बहुत ज्यादा भोजन करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में खाएं।

3\. परेशानी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ पहचानें: कुछ लोगों में मसालेदार या अधिक वसायुक्त भोजन, चाय, कॉफी अथवा अन्य खाद्य पदार्थ एसिडिटी बढ़ा सकते हैं। अपने लक्षणों के अनुसार खानपान में बदलाव करें।

4\. वजन नियंत्रित रखें: अधिक वजन वाले लोगों में वजन कम करने से एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों में सुधार हो सकता है।

5\. लगातार दवा लेने की जरूरत की समीक्षा कराएं: यदि दवा बंद करने पर समस्या दोबारा होती है, तो खुद से उसकी खुराक बढ़ाने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या गैस की दवा अचानक बंद कर देनी चाहिए?

इसका जवाब सभी मरीजों के लिए एक जैसा नहीं है। कुछ दवाएं थोड़े समय के लिए दी जाती हैं, जबकि कुछ बीमारियों में लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक PPI लेने वाले कुछ लोगों में दवा बंद करने के बाद अस्थायी रूप से एसिडिटी बढ़ सकती है।

इसलिए यदि डॉक्टर ने किसी बीमारी के उपचार के लिए दवा निर्धारित की है, तो उनकी सलाह के बिना उसे बंद न करें। डॉक्टर लक्षणों, बीमारी के कारण और जोखिमों का आकलन करके खुराक कम करने, दवा बदलने या उपचार जारी रखने का फैसला कर सकते हैं।

निष्कर्ष: राहत के साथ सेहत की सुरक्षा भी जरूरी

गैस और एसिडिटी की दवाएं कई लोगों के लिए जरूरी और प्रभावी उपचार हैं। लेकिन बिना जरूरत लंबे समय तक दवा लेना या बार-बार होने वाली एसिडिटी के कारणों की जांच नहीं कराना उचित नहीं है। कुछ PPI दवाओं के साथ किडनी संबंधी दुर्लभ दुष्प्रभाव सामने आए हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि हर मरीज को किडनी की बीमारी हो जाएगी।

सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह से करें, जरूरत के अनुसार उसकी समीक्षा कराएं और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। सही खानपान, नियमित दिनचर्या और समय पर जांच से एसिडिटी को नियंत्रित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

स्वास्थ्य सूचना: यह लेख सामान्य जागरूकता के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है।

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