नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले का आगाज आज

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ध्वजारोहण समारोह में होंगी शामिल नाशिक। महाराष्ट्र के नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नाशिक के रामकुंड में आयोजित ध्वज स्तंभ पूजन और ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होंगी। दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर […]

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  • October 31, 2026 9:07 am IST, Published 25 minutes ago

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ध्वजारोहण समारोह में होंगी शामिल

नाशिक। महाराष्ट्र के नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नाशिक के रामकुंड में आयोजित ध्वज स्तंभ पूजन और ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होंगी। दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर होने वाले इस समारोह के साथ करीब 22 महीने तक चलने वाले धार्मिक आयोजन का शुभारंभ होगा।

सिंहस्थ कुंभ मेले को लेकर दोनों धार्मिक शहरों में तैयारियां की गई हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु गोदावरी नदी में पवित्र स्नान करेंगे। नाशिक में रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ स्नान के प्रमुख केंद्र रहेंगे।

राष्ट्रपति करेंगी कार्यक्रम को संबोधित

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के साथ कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगी। आयोजन के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, शंखनाद और अन्य पारंपरिक कार्यक्रम होंगे।

इस अवसर पर शंखनाद से जुड़े गिनीज विश्व रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी सौंपे जाने की जानकारी दी गई है। इससे पहले शुक्रवार को नाशिक में महाध्वज ग्राम परिक्रमा का आयोजन किया गया, जिसमें धार्मिक परंपराओं के अनुसार श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

सिंहस्थ कुंभ मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, नाशिक में लगभग 8 से 10 करोड़ और त्र्यंबकेश्वर में करीब 4 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

कुंभ मेले के दौरान नाशिक में स्नान के लिए 44 और त्र्यंबकेश्वर में 53 शुभ मुहूर्त निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। इन अवसरों पर अलग-अलग अखाड़ों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े साधु-संतों के साथ श्रद्धालु पवित्र स्नान करेंगे।

इस कुंभ की एक विशेषता यह है कि वैष्णव और शैव अखाड़ों के स्नान अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर होते हैं। नाशिक और त्र्यंबकेश्वर को एक ही सिंहस्थ आयोजन के दो प्रमुख केंद्र माना जाता है।

क्यों कहा जाता है सिंहस्थ कुंभ?

नाशिक में आयोजित होने वाले कुंभ मेले को सिंहस्थ कहा जाता है। इसके पीछे ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। परंपरागत गणना के अनुसार, जब बृहस्पति ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करता है, तब इस कुंभ का विशेष महत्व माना जाता है। इसकी तिथियां ग्रहों की स्थिति, धार्मिक परंपराओं और अखाड़ों की सहमति के आधार पर तय की जाती हैं।

हिंदू मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। मान्यता है कि इस दौरान अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नाशिक में गिरी थीं। इसी धार्मिक विश्वास के कारण इन चार स्थानों पर कुंभ मेले का आयोजन होता है।

सुरक्षा और सुविधाओं पर रहेगा जोर

करोड़ों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन को देखते हुए प्रशासन के सामने यातायात, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने की व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी। विशेष स्नान पर्वों के दौरान भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता महत्वपूर्ण रहेगी।

नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और भारतीय संस्कृति का बड़ा आयोजन है। ध्वजारोहण के साथ शुरू हो रहा यह पर्व आने वाले महीनों में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।

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