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उद्धव गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तय की अंतिम सुनवाई की तारीख

यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभाजन और उसके बाद दोनों गुटों के बीच जारी कानूनी विवाद से जुड़ा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी की पहचान, संगठनात्मक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों की स्थिति को लेकर अलग-अलग स्तरों पर विवाद सामने आते रहे हैं। सांसदों के विलय को मान्यता देने के फैसले को

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • October 27, 2026 5:40 pm IST, Published 36 minutes ago

नई दिल्ली: शिवसेना के दो गुटों के बीच छह सांसदों के विलय को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल किए जाने की मान्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर अंतिम सुनवाई के लिए 8 दिसंबर की तारीख तय की है। इस मामले में अदालत का फैसला लोकसभा में दोनों गुटों के प्रतिनिधित्व और उनकी राजनीतिक स्थिति पर असर डाल सकता है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद गणपत सावंत की याचिका पर सुनवाई की। सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में विलय को मान्यता दी गई थी। याचिका में इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि जुलाई में नोटिस जारी होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि मामले में जवाब दाखिल करने और सुनवाई आगे बढ़ाने के लिए अदालत को कितना और इंतजार करना पड़ेगा। पीठ ने भी लोकसभा अध्यक्ष की ओर से किसी प्रतिनिधि के उपस्थित नहीं होने पर सवाल किया। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने बताया कि अदालत का नोटिस विधिवत लोकसभा सचिवालय को भेजा जा चुका है। अदालत ने नोटिस की तामील से संबंधित स्थिति पर विचार करते हुए मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया।

इस प्रकरण की सुनवाई पहले भी टल चुकी है। अगस्त में जब मामला अदालत के सामने आया था, तब लोकसभा अध्यक्ष की ओर से किसी प्रतिनिधि की अनुपस्थिति के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाई थी। इस बार पीठ ने मामले को लंबे समय तक लंबित रखने के बजाय अंतिम निस्तारण के लिए 8 दिसंबर की तारीख निर्धारित की है। अब दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध कानूनी तथ्यों के आधार पर आगे की सुनवाई होगी।

विवाद से जुड़े छह सांसदों में संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, नागेश पाटिल-आष्टिकर, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इन सांसदों के शिंदे गुट में जाने के बाद लोकसभा में उस गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई थी, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की संख्या घटकर तीन रह गई थी।

यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के विभाजन और उसके बाद दोनों गुटों के बीच जारी कानूनी विवाद से जुड़ा है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के बीच पार्टी की पहचान, संगठनात्मक अधिकारों और जनप्रतिनिधियों की स्थिति को लेकर अलग-अलग स्तरों पर विवाद सामने आते रहे हैं। सांसदों के विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में इसकी वैधानिकता पर सुनवाई होनी है।

8 दिसंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत के सामने यह मुद्दा प्रमुख रहेगा कि लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर क्या कानूनी निष्कर्ष निकलता है। मामले का अंतिम निर्णय दोनों गुटों के संसदीय प्रतिनिधित्व और संबंधित फैसले की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल अदालत ने अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है और मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है।

 

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