नई दिल्ली। भारत में अब समय को लेकर एकरूपता लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नियमों के तहत देश में कानूनी, प्रशासनिक, कमर्शियल और डिजिटल गतिविधियों के लिए इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) को मानक समय संदर्भ बनाया जाएगा।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे। अधिसूचना 29 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुई है, इसलिए नियम करीब मार्च 2027 से प्रभावी होंगे। नियमों का उल्लंघन करने पर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत कार्रवाई और दंड का प्रावधान है।
नए नियमों के तहत कानूनी, प्रशासनिक और आधिकारिक दस्तावेजों में समय का संदर्भ IST होगा, जब तक कि किसी विशेष मामले में अलग समय का उपयोग करने की अनुमति न हो।
IST को कॉमर्स, परिवहन, सार्वजनिक प्रशासन, कानूनी अनुबंध और वित्तीय गतिविधियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में मानक समय संदर्भ बनाया गया है।
सरकार का उद्देश्य पूरे देश में समय के इस्तेमाल को एक समान बनाना और अलग-अलग प्रणालियों में समय के अंतर से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करना है।
नियमों के अनुसार सामान्य आधिकारिक और व्यावसायिक कामकाज में IST के अलावा किसी अन्य समय संदर्भ को इस्तेमाल, प्रदर्शित या रिकॉर्ड करने पर रोक होगी।
हालांकि, नियमों में कुछ अपवाद भी रखे गए हैं। विदेशी टाइम जोन को स्पष्ट रूप से लेबल करके प्रदर्शित किया जा सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिक अनुसंधान, नेविगेशन और खगोल विज्ञान जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में वैकल्पिक टाइम स्केल के इस्तेमाल की अनुमति निर्धारित शर्तों के तहत दी जा सकती है।
नए नियम सिर्फ सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं हैं। टेलीकॉम, वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा और डेटा सेंटर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समय-निर्भर प्रणालियों को अधिकृत टाइमिंग सोर्स के जरिए IST से सिंक्रोनाइज करने का प्रावधान किया गया है।
नियमों में NPLI, Regional Reference Standards Laboratories, NavIC, National Informatics Centre और अन्य अधिकृत टाइमिंग सोर्स के माध्यम से समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था का उल्लेख है।
आज के डिजिटल दौर में कई सिस्टम बेहद सटीक समय पर निर्भर करते हैं। ऑनलाइन पेमेंट, स्टॉक मार्केट, टेलीकॉम नेटवर्क, 5G, डिजिटल नेविगेशन, पावर ग्रिड और डेटा सेंटर में लेनदेन और नेटवर्क गतिविधियों को सही समय के साथ सिंक्रोनाइज करना जरूरी होता है।
सरकार का मानना है कि एक राष्ट्रीय समय-सिंक्रोनाइजेशन व्यवस्था से सटीकता, विश्वसनीयता, ट्रेसेबिलिटी और ऑपरेशनल सुरक्षा बेहतर हो सकती है।
नियमों में साइबर सिक्योरिटी और सिस्टम की मजबूती पर भी विशेष जोर दिया गया है। संस्थाओं को समय-सिंक्रोनाइजेशन सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैकल्पिक और रिडंडेंट टाइमिंग सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी।
जैमिंग, स्पूफिंग और साइबर अटैक जैसी परिस्थितियों में भी समय की सेवा बाधित न हो, इसके लिए कंटीजेंसी प्लान और बैकअप व्यवस्था रखने का प्रावधान है। जरूरत पड़ने पर अत्यधिक स्थिर और सटीक एटॉमिक क्लॉक जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नियमों के अनुसार CSIR-National Physical Laboratory (NPLI) भारत की प्राथमिक समय-स्केल को बनाए रखेगा और IST को अंतरराष्ट्रीय UTC से ट्रेसेबल रखेगा।
IST का मानक समय UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। नियमों में NPLI, क्षेत्रीय संदर्भ प्रयोगशालाओं और अधिकृत टाइमिंग सोर्स के जरिए IST के प्रसार और सिंक्रोनाइजेशन की व्यवस्था की गई है।
नए नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था पर लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत कार्रवाई और दंड लगाया जा सकता है। नियमों के अनुपालन की निगरानी और प्रवर्तन की जिम्मेदारी लीगल मेट्रोलॉजी डिवीजन के पास होगी।
सरकार का यह कदम देशभर में एक समान, सटीक और सुरक्षित समय व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।