आज मध्यरात्रि में होगा कान्हा का जन्मोत्सव नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज, 4 सितंबर 2026 को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर रहे हैं […]
September 4, 2026 8:25 am IST, Published 10 minutes ago
आज मध्यरात्रि में होगा कान्हा का जन्मोत्सव
नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज, 4 सितंबर 2026 को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना कर रहे हैं और मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म का उत्सव मनाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के समय होने वाली पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष भी 4 सितंबर को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बताया गया है।
जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर के कृष्ण मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। कई स्थानों पर कृष्ण जन्म की झांकियां भी सजाई गई हैं।
मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी का विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।
मध्यरात्रि में होगा श्रीकृष्ण जन्म
धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी पर रात 12 बजे के आसपास विशेष पूजा की जाती है। मथुरा के लिए उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक बताया गया है।
इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक, श्रृंगार और आरती की जाएगी। भक्त भगवान के जन्म के बाद शंख और घंटियां बजाकर जन्मोत्सव मनाएंगे।
व्रत और पूजा की तैयारी
जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। दिनभर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण और पूजा करने के बाद मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार व्रत का पारण करते हैं।
घर-घर में भी लड्डू गोपाल की पूजा के लिए विशेष तैयारी की गई है। भक्तों ने भगवान के लिए झूले सजाए हैं और माखन-मिश्री, पंचामृत तथा विभिन्न प्रकार के प्रसाद तैयार किए हैं।
5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव
जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर को कई स्थानों पर दही हांडी और नंदोत्सव का आयोजन किया जाएगा। दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाकर युवाओं की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं। यह आयोजन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और माखन चोरी की परंपरा से जुड़ा माना जाता है।
जन्माष्टमी के पर्व पर मंदिरों और धार्मिक स्थलों में “जय श्रीकृष्ण”, “राधे-राधे” और “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारे गूंज रहे हैं। भक्त भगवान श्रीकृष्ण से सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।