नयी दिल्ली: कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कई सवाल उठाए। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष के साथ सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक, अंबिका सोनी, कुमारी शैलजा और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बैठक में बुलाया गया था। बैठक का प्रमुख मुद्दा चुनाव आयोग, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर पार्टी की आगे की रणनीति रहा।
खरगे ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और मतदाता सूचियों में बदलाव के जरिए नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए उनके पद से हटाए जाने की मांग दोहराई। कांग्रेस ने पहले भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन और राजनीतिक अभियान चलाने की बात कही है।
खरगे ने कहा कि भारत में मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर की ओर से मताधिकार को लेकर व्यक्त विचारों का हवाला देते हुए कहा कि किसी पात्र नागरिक का नाम मनमाने तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता सूची में किसी भी तरह का संशोधन स्पष्ट प्रक्रिया, उचित सूचना और अपील के अवसर के साथ होना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर ही SIR, मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मामलों पर मतभेद सामने आए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आया है। आयोग ने कहा है कि SIR से संबंधित फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और फैसले सर्वसम्मति से हुए। आयोग की ओर से कथित ‘एक व्यक्ति के नियंत्रण’ संबंधी रिपोर्टों को भी खारिज किया गया है।
बैठक में फॉर्म-6 को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए। फॉर्म-6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। खरगे ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बदलाव युवाओं के मताधिकार को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त घोषणा संबंधी प्रावधान जोड़ा गया है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मतदाता सेवाओं के तहत नए मतदाताओं के पंजीकरण और अन्य चुनावी सेवाओं की जानकारी उपलब्ध है।
खरगे ने राहुल गांधी द्वारा पहले उठाए गए मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची से संबंधित कथित विसंगतियों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। कांग्रेस की ओर से डुप्लीकेट मतदाताओं, संदिग्ध पतों और मतदाता सूची में असामान्य प्रविष्टियों जैसे मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। पार्टी का कहना है कि इन मामलों की जांच और आंकड़ों की सार्वजनिक उपलब्धता जरूरी है।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष श्री @kharge का वक्तव्य:
आज की बैठक महत्वपूर्ण है। फिर से कांग्रेस के कंधों पर अंग्रेजी राज की तरह ही भारत के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ऐतिहासिक जिम्मेवारी खड़ी है। अंग्रेजों से हमने वोट का हक छीनकर लिया था। आज उसी… pic.twitter.com/OPkZ2bbHpf
— Congress (@INCIndia) September 29, 2026
CWC बैठक में खरगे ने मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस की कई मांगें सामने रखीं। इनमें मतदाता सूची में बड़े बदलाव से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक करना, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं उन्हें इसकी सूचना देना और अपील का अवसर उपलब्ध कराना शामिल है। कांग्रेस ने राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से जुड़े आवश्यक आंकड़े समय पर और सरल प्रारूप में उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।
खरगे ने अपने संबोधन में इसे किसी एक राजनीतिक दल या व्यक्ति के खिलाफ लड़ाई के बजाय मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे को लेकर देशभर में अभियान चलाने का आह्वान किया। कांग्रेस की रणनीति में आगे आंदोलन, राजनीतिक संवाद और विपक्षी दलों के साथ समन्वय शामिल हो सकता है। INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं की 30 सितंबर को होने वाली बैठक में भी चुनाव आयोग, SIR और ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है।
इस पूरे विवाद में कांग्रेस के आरोपों के साथ चुनाव आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। आयोग खुद को चुनाव प्रक्रिया संचालित करने वाली स्वायत्त संवैधानिक संस्था बताता है और मतदाता सेवाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल उपलब्ध कराता है। ऐसे में SIR, मतदाता सूची में संशोधन और फॉर्म-6 को लेकर राजनीतिक दलों तथा चुनाव आयोग के बीच जारी मतभेद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकते हैं।