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पोर्न ऐप के नाम पर Android यूजर्स से साइबर ठगी

Facebook-Instagram के विज्ञापनों से APK डाउनलोड करा डिवाइस का कंट्रोल ले रहे ठग नई दिल्ली। पोर्न ऐप के नाम पर Android यूजर्स को निशाना बनाकर साइबर ठगी का नया तरीका सामने आया है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत काम करने वाली नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने यूजर्स को ऐसे खतरनाक […]

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  • September 1, 2026 7:53 am IST, Published 2 hours ago

Facebook-Instagram के विज्ञापनों से APK डाउनलोड करा डिवाइस का कंट्रोल ले रहे ठग

नई दिल्ली। पोर्न ऐप के नाम पर Android यूजर्स को निशाना बनाकर साइबर ठगी का नया तरीका सामने आया है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत काम करने वाली नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (NCTAU) ने यूजर्स को ऐसे खतरनाक ऐप्स से सावधान रहने की सलाह दी है।

साइबर अपराधी पोर्नोग्राफिक कंटेंट का लालच देकर यूजर्स से ऐसे Android ऐप डाउनलोड करा रहे हैं, जो डिवाइस की Accessibility Permission का दुरुपयोग कर सकते हैं। एक बार जरूरी परमिशन मिलने के बाद ये ऐप यूजर के फोन पर काफी हद तक नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और इसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।

Facebook और Instagram पर फर्जी विज्ञापन

NCTAU के मुताबिक, Night Play, Reloop, Kyss, Riva, Vima, Nexo और Vixa जैसे नामों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram पर भ्रामक विज्ञापन प्रसारित किए जा रहे थे।

इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को ऐसी वेबसाइटों पर भेजा जाता है, जहां पोर्नोग्राफिक कंटेंट का लालच देकर उन्हें Google Play Store के बाहर से APK फाइल डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है।

APK इंस्टॉल करते ही बढ़ जाता है खतरा

ऐप इंस्टॉल करने के बाद यूजर से ऐसी परमिशन मांगी जा सकती है, जिसके जरिए ऐप दूसरे ऐप्स को इंस्टॉल करने की क्षमता हासिल कर लेता है। इसके बाद साइबर अपराधी डिवाइस की गतिविधियों पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर सकते हैं।

इस तरह के ऐप्स का इस्तेमाल संवेदनशील जानकारी हासिल करने और बैंकिंग या अन्य वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।

VPN के जरिए भी हो सकती है संदिग्ध गतिविधि

एडवाइजरी के अनुसार, कुछ संदिग्ध ऐप्स डिवाइस में VPN भी इंस्टॉल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों से जुड़े इंटरनेट ट्रैफिक को किसी दूसरे नेटवर्क या सर्वर के जरिए रूट करने के लिए किया जा सकता है।

इससे यूजर के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि उसके डिवाइस और इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है।

ऐप को हटाना भी कर सकते हैं मुश्किल

साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कुछ ऐप्स डिवाइस की सेटिंग्स के जरिए खुद को अनइंस्टॉल किए जाने से रोकने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में यूजर के लिए फोन से खतरनाक ऐप को हटाना मुश्किल हो सकता है।

कैसे बचें साइबर ठगी से?

NCTAU ने Android यूजर्स को सलाह दी है कि वे किसी भी अनजान वेबसाइट से APK फाइल डाउनलोड न करें। ऐप्स को केवल Google Play Store या किसी भरोसेमंद आधिकारिक ऐप स्टोर से ही इंस्टॉल करें।

इसके अलावा, किसी अनजान ऐप को Accessibility, Device Admin या अन्य संवेदनशील परमिशन देने से पहले अच्छी तरह जांच करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले ऐसे विज्ञापनों पर क्लिक करने से भी बचें, जो असामान्य या आपत्तिजनक कंटेंट का लालच देकर ऐप डाउनलोड करने के लिए कहें।

साइबर सुरक्षा का सबसे आसान नियम है—अनजान लिंक पर क्लिक न करें, बाहर से APK इंस्टॉल न करें और किसी संदिग्ध ऐप को संवेदनशील परमिशन न दें।

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