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800 प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद गडकरी सख्त, बोले- सड़क गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल ईंधन खरीदने पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। उनके अनुसार, यदि देश आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता घटाने में सफल होता है, तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने भविष्य में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

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  • October 27, 2026 4:40 pm IST, Published 46 minutes ago

नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि अगले दो वर्षों में सड़कों की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया जाएगा। गडकरी ने कहा कि निर्माण कार्यों में लापरवाही और अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ठेकेदारों, अधिकारियों और परियोजना से जुड़े सलाहकारों को चेतावनी देते हुए कहा कि गुणवत्ता के साथ समझौता करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने बताया कि वह सड़क निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले तीन से चार महीनों में करीब 800 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य निर्माण कार्यों में आने वाली खामियों की पहचान करना और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना है। मंत्री ने दावा किया कि लगातार निगरानी के कारण ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर दबाव बढ़ा है।

गडकरी ने सड़क निर्माण में सुधार के लिए सोशल मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें कहीं सड़क निर्माण में गड़बड़ी, खराब गुणवत्ता या अन्य अनियमितता दिखाई देती है, तो उसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करें। उनके मुताबिक, ऐसी शिकायतों से संबंधित अधिकारियों तक समस्या पहुंचाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मंचों के जरिए सामने आने वाली शिकायतों के कारण खामियों को छिपाना पहले की तुलना में मुश्किल हुआ है।

केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता उनकी प्राथमिकता है और इस मामले में किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी परियोजना में जानबूझकर लापरवाही या बेईमानी पाई गई, तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बैंक गारंटी जब्त करने और अनियमितताओं को सार्वजनिक करने जैसे उपायों का भी उल्लेख किया। गडकरी ने कहा कि उनका लक्ष्य निर्माण कार्यों में जवाबदेही बढ़ाना और लोगों को बेहतर सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने दावा किया कि इस साल सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं में कमी आई है और आने वाले वर्ष में स्थिति और बेहतर होगी। हालांकि, इन लक्ष्यों की वास्तविक सफलता का आकलन परियोजनाओं की गुणवत्ता, शिकायतों के निपटारे और सड़कों के रखरखाव से जुड़े परिणामों के आधार पर किया जा सकेगा।

कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने ई-20 पेट्रोल को लेकर उठे सवालों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में लगभग चार करोड़ कारें और 20 करोड़ दोपहिया वाहन चलते हैं। उनके मुताबिक, कुछ महीने पहले ई-20 पेट्रोल को लेकर काफी चर्चा और आलोचना हुई थी, लेकिन अब इस विषय पर शोर कम हो गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से लोगों के वाहन बड़े पैमाने पर बंद हुए हैं। गडकरी ने आलोचना के एक हिस्से को पेड प्रोपेगेंडा बताया, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कार्यक्रम के दौरान कोई विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।

ई-20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने का प्रावधान होता है। इथेनॉल का उत्पादन गन्ने और अन्य कृषि आधारित स्रोतों से किया जा सकता है। सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक अवसर पैदा करना है। हालांकि, अलग-अलग वाहनों में ईंधन की अनुकूलता और उसके संभावित प्रभावों को लेकर उपभोक्ताओं के सवालों का जवाब तकनीकी जानकारी और संबंधित वाहन निर्माता के निर्देशों के आधार पर दिया जाना चाहिए।

गडकरी ने कहा कि भारत हर साल ईंधन खरीदने पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। उनके अनुसार, यदि देश आयातित ईंधन पर अपनी निर्भरता घटाने में सफल होता है, तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है। उन्होंने भविष्य में जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। गडकरी के बयान में सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुधारने, परियोजनाओं की निगरानी बढ़ाने और वैकल्पिक ईंधन को प्रोत्साहित करने पर जोर रहा। अब इन घोषणाओं और दावों का असर आने वाले समय में सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता, ईंधन नीति और उपभोक्ताओं को मिलने वाले लाभों के आधार पर देखा जाएगा।

 

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