नई दिल्ली: इतिहास के पन्नों में 22 अक्टूबर का दिन देश और दुनिया के लिए बेहद खास और ऐतिहासिक मायनों वाला रहा है। आज ही के दिन भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा था, वहीं औपनिवेशिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति को बदलने वाली ऐतिहासिक घटना भी आज ही के दिन घटी थी। आइए डालते हैं 22 अक्टूबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं पर एक नजर:
2008: ‘चंद्रयान-1’ की ऐतिहासिक लॉन्चिंग
भारत ने अपने पहले मानवरहित चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-1’ का सफल प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया। इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि चंद्रमा पर पानी के कणों (Water Molecules) की खोज करना थी, जिसने वैश्विक स्तर पर इसरो (ISRO) का परचम लहराया।
1764: ऐतिहासिक बक्सर का युद्ध
भारत के इतिहास को नया मोड़ देने वाली बक्सर की लड़ाई 22 अक्टूबर 1764 को लड़ी गई थी। इसमें ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने बंगाल के नवाब मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना को पराजित कर भारत में अपनी प्रशासनिक पकड़ मजबूत की थी।
1963: भाखड़ा नांगल बांध राष्ट्र को समर्पित
देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक भाखड़ा नांगल बांध को राष्ट्र को समर्पित किया था। यह देश के बुनियादी ढांचे और सिंचाई व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ।
1879: ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला राजद्रोह का मुकदमा
अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी कदम उठाने वाले बासुदेव बलवंत फड़के के खिलाफ अंग्रेजों ने भारत में राजद्रोह का पहला मुकदमा दर्ज किया था।
1964: ज्यां पाल सार्त्र ने ठुकराया नोबेल पुरस्कार
प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक और लेखक ज्यां पाल सार्त्र (Jean-Paul Sartre) ने साहित्य के नोबेल पुरस्कार को स्वीकार करने से मना कर दिया था।
1900: स्वतंत्रता संग्राम के महान और अमर क्रांतिकारी अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ का जन्म हुआ था।
1937: हिंदी और उर्दू फिल्मों के मशहूर अभिनेता और संवाद लेखक कादर खान का जन्म हुआ था।
1873: प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक नेता और व्यावहारिक वेदांत के विचारक स्वामी रामतीर्थ का जन्म हुआ था।
1933: भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और सरदार वल्लभभाई पटेल के बड़े भाई विट्ठलभाई पटेल का निधन हुआ था।
1954: बांग्ला भाषा के प्रख्यात कवि और साहित्यकार जीवनानन्द दास का निधन हुआ था।