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SCO बैठक में भारत का सख्त रुख,आतंकवाद पर दोहरा मापदंड नहीं चलेगा

रक्षा मंत्री के इस बयान की एक अहम बात यह रही कि उस समय बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे।

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Gauravshali Bharat News
  • October 20, 2026 4:20 pm IST, Published 30 minutes ago

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपना रुखस्पष्ट करते हुए कहा कि इस गंभीर चुनौती से निपटने में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंहने आतंकवाद को समर्थन देने, उसके लिए धन उपलब्ध कराने और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाईकी जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करना जरूरी है, क्योंकि इसके खिलाफ लड़ाई में किसी भी प्रकार काऔचित्य या भेदभाव नहीं होना चाहिए।

दुशांबे स्थित पैलेस ऑफ द नेशन में ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन ने राजनाथ सिंह और SCO के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियोंका स्वागत किया। इस बैठक में भारत की ओर से रक्षा मंत्री हिस्सा ले रहे हैं। संगठन के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, आपसी सहयोग औरसाझा चुनौतियों पर चर्चा इस बैठक के प्रमुख पहलुओं में शामिल है।

राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर दिया गया संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमापार आतंकवाद का मुद्दा भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में प्रमुख बना हुआ है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद को किसी भीपरिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, आतंकवादी संगठनों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, राजनीतिक संरक्षण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आतंकवाद के लिए कोई औचित्य नहीं हो सकता और उससे निपटने के लिए सभी देशों कोसमान मानदंड अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को आर्थिक मदद देने, उनका समर्थन करने या उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को मजबूती से समाप्त करने की जरूरत है।

रक्षा मंत्री के इस बयान की एक अहम बात यह रही कि उस समय बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार भी मौजूद थे। ऐसे में राजनाथ सिंह की टिप्पणी को भारत की आतंकवाद विरोधी नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े उसके रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।हालांकि, बयान में किसी देश का नाम लिए जाने की पुष्टि के बिना इसे किसी एक देश को सीधे संबोधित टिप्पणी के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ एक समान वैश्विक नीति अपनाने की वकालत करता रहा है। भारत का तर्क है कि आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई केवल हमलों के बाद तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके वित्तीय स्रोतों, नेटवर्क और उन्हेंमिलने वाले संरक्षण पर भी ध्यान देना चाहिए। राजनाथ सिंह का ताजा संदेश इसी नीति के अनुरूप दिखाई देता है।

SCO भारत सहित कई सदस्य देशों के बीच सुरक्षा और आर्थिक सहयोग का महत्वपूर्ण मंच है। इस संगठन में आतंकवाद, अलगाववाद औरउग्रवाद से निपटने के लिए सहयोग पर भी चर्चा होती रही है। भारत के लिए यह मंच अपनी सुरक्षा चिंताओं को अन्य सदस्य देशों के सामने रखनेऔर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर देने का अवसर प्रदान करता है।

दुशांबे में हुई बैठक का एजेंडा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में व्यापार, अर्थव्यवस्था, निवेश,संपर्क व्यवस्था, नवाचार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषय भी प्रमुख हैं। सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने और संगठन की गतिविधियों की समीक्षा पर भी चर्चा होनी है।

इस बैठक में भारत का जोर दो प्रमुख बिंदुओं पर दिखाई देता है—एक ओर सदस्य देशों के साथ सहयोग मजबूत करना और दूसरी ओर आतंकवाद के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करना। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SCO के सदस्य देश आतंकवाद से मुकाबले के लिए साझा प्रतिबद्धताओं को किस तरह ठोस कदमों में बदलते हैं।

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