नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई है। उन्होंने आग्रह किया कि परिसीमन से जुड़े नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा की जाए। खरगे का कहना है कि इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श और राजनीतिक सहमति जरूरी है, क्योंकि परिसीमन से जुड़े संवैधानिक बदलावों का देश की राजनीति और प्रतिनिधित्व व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में खरगे ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को प्रस्तावित बदलावों पर अपनी राय रखने और दूसरे दलों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह किसी महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में संसद से पारित कराने की कोशिश न करे। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, ऐसे विषयों पर निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों की चिंताओं और सुझावों को सुनना आवश्यक है।
खरगे ने अपने पत्र में संसद के मानसून सत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी संसद के दोनों सदनों का सत्रावसान नहीं किया गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सरकार की आगे की रणनीति को लेकर सवाल उठाए और दोबारा सर्वदलीय बैठक बुलाने की जरूरत बताई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पहली बार 11 अप्रैल 2026 को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक आयोजित करने का आग्रह किया था। उनकी मांग थी कि परिसीमन से संबंधित किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को संसद में लाने से पहले राजनीतिक दलों के साथ चर्चा की जाए। खरगे के अनुसार, इसके बाद सरकार ने 14 अप्रैल की देर शाम संबंधित विधेयकों को सार्वजनिक किया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया।
I have written to PM @narendramodi ji for the fourth time, demanding an All-Party meeting before any fresh Constitutional Amendment Bill on Delimitation is finalised.
The previous Bill failed to secure the requisite two-thirds majority. Such far-reaching constitutional changes cannot be bulldozed through Parliament without meaningful consultations.
Even 64 days after the Monsoon Session was adjourned sine die, both Houses are yet to be prorogued. This unprecedented situation raises serious questions.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 16, 2026
खरगे ने दावा किया कि परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को 17 अप्रैल को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। उन्होंने इसे सरकार के प्रस्ताव के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका बताते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से व्यापक सहमति बनाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है। हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष और विधेयक से जुड़े सभी संवैधानिक पहलुओं को ध्यान में रखकर ही पूरे घटनाक्रम का आकलन किया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को प्रधानमंत्री को दोबारा पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक की मांग उठाई थी। अब चौथी बार उन्होंने आग्रह किया है कि नए प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को शामिल किया जाए। उनका कहना है कि दलों को अपने स्तर पर चर्चा करने के साथ-साथ एक-दूसरे और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ विचार साझा करने का अवसर मिलना चाहिए।
खरगे ने सरकार को आगाह किया कि पिछली बार की तरह किसी महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, परिसीमन जैसे विषय पर व्यापक राजनीतिक संवाद और सहमति के आधार पर ही आगे बढ़ना उचित होगा। कांग्रेस की मांग है कि प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों की राय ली जाए, ताकि संसद में चर्चा अधिक सार्थक हो सके।
अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और सर्वदलीय बैठक को लेकर उसके रुख पर नजर रहेगी। यदि बैठक बुलाई जाती है, तो उसमें परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों, संवैधानिक बदलावों और राजनीतिक दलों की चिंताओं पर चर्चा हो सकती है। फिलहाल, खरगे ने अपने पत्र के माध्यम से सरकार से संवाद की प्रक्रिया शुरू करने और किसी भी बड़े निर्णय से पहले व्यापक सहमति बनाने की अपील की है।