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India-EU FTA पर बड़ा अपडेट, MSME और ग्रीन ट्रेड पर जोर

ब्रसेल्स में आयोजित एक उच्चस्तरीय संवाद में व्यापार, निवेश, टिकाऊ विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

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Gauravshali Bharat News
  • October 6, 2026 7:30 pm IST, Published 50 minutes ago

ब्रसेल्स । भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाले भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) को लेकर ब्रसेल्स में आयोजित एक उच्चस्तरीय संवाद में व्यापार, निवेश, टिकाऊ विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। यूरोपीय संसद में आयोजित “पीस एंड प्रॉस्पेरिटी ऑफ साउथ एशिया” विषयक संवाद में राजनयिकों, व्यापार विशेषज्ञों, उद्यमियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े प्रतिनिधियों ने भारत और यूरोप के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विचार साझा किए।

सम्मेलन का आयोजन श्री Ondřej Dostál द्वारा किया गया। कार्यक्रम में भारत-ईयू साझेदारी के बदलते स्वरूप, व्यापार एवं निवेश सहयोग, जलवायु कार्रवाई, सतत विकास और दक्षिण एशिया में आर्थिक समृद्धि के व्यापक मुद्दों पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम में United Diplomatic Council (UDC) के अध्यक्ष डॉ. आसिफ इकबाल, उपाध्यक्ष श्री वाली काशवी और India-EU Trade Council के ट्रेड कमिश्नर श्री अंकित जैन सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। पूर्व जर्मन राजनयिक डॉ. पीटर फारेनहोल्ट्ज, डॉ. नूरान नबी, बेल्जियम स्थित Hand in Hand Foundation के महासचिव ए.एफ.एम. गोलाम जिलानी तथा श्री सतर अली सुमन सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी संवाद में भाग लिया।

MSME को वैश्विक व्यापार के लिए तैयार करने पर जोर

संवाद के दौरान डॉ. आसिफ इकबाल ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी का लाभ छोटे और मध्यम उद्यमों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-ईयू आर्थिक सहयोग का अगला चरण तभी अधिक प्रभावी होगा, जब इसमें बड़े उद्योगों के साथ MSME, छोटे कारोबारी और नए उद्यमी भी सक्रिय रूप से शामिल हों।

उन्होंने यूरोपीय संघ की बदलती पर्यावरणीय और स्थिरता संबंधी व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि EUDR, CSRD और CBAM जैसे फ्रेमवर्क वैश्विक व्यापार में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और टिकाऊ आर्थिक गतिविधियों की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं।

हालांकि, इन मानकों को पूरा करना छोटे कारोबारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में MSME क्षेत्र को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और क्षमता निर्माण की जरूरत होगी। डॉ. इकबाल ने इस दिशा में चरणबद्ध और सहयोगात्मक व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, ताकि छोटे उद्यम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें और वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकें।

उन्होंने भारत और यूरोप के संस्थानों के बीच प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्थिरता और अनुपालन संबंधी तैयारियों को लेकर अधिक संस्थागत सहयोग की जरूरत पर भी बल दिया।

ग्रीन टेक्नोलॉजी से बदल सकती है अंतिम संस्कार व्यवस्था

संवाद में टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दों के बीच India-EU Trade Council के ट्रेड कमिश्नर श्री अंकित जैन ने भारत में अंतिम संस्कार से जुड़ी अवसंरचना को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की संभावनाओं को भी चर्चा में रखा।

उन्होंने कहा कि भारत के व्यापक जलवायु और डीकार्बोनाइजेशन एजेंडे में cremation infrastructure का डीकार्बोनाइजेशन एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई है। आधुनिक और स्वच्छ तकनीकों के इस्तेमाल, उत्सर्जन की बेहतर निगरानी, टिकाऊ ऊर्जा समाधानों तथा उचित कार्बन अकाउंटिंग के माध्यम से इस क्षेत्र में सुधार की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।

श्री जैन ने इस क्षेत्र से जुड़े अनुमानित 70 लाख टन CO₂ उत्सर्जन के आंकड़े को आगे के आकलन और नीतिगत विचार-विमर्श का विषय बताया। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत अध्ययन और वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया।

उनके अनुसार, अंतिम संस्कार स्थलों के डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में भारत और यूरोप के संस्थानों के बीच हरित तकनीक, टिकाऊ अवसंरचना, कार्बन अकाउंटिंग, जलवायु वित्त और विशेषज्ञता साझा करने जैसे क्षेत्रों में सहयोग विकसित किया जा सकता है।

India-EU FTA से कारोबार को मिल सकता है नया अवसर

ब्रसेल्स संवाद में भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा गया। समझौते से जुड़े आवश्यक अनुमोदन और अनुसमर्थन की प्रक्रियाओं के बीच प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय और यूरोपीय कारोबारी समुदाय को आने वाले अवसरों के लिए पहले से तैयार रहना होगा।

विशेष रूप से MSME क्षेत्र के लिए बाजार की आवश्यकताओं, पर्यावरणीय मानकों, तकनीकी अनुपालन और निर्यात प्रक्रियाओं को समझना महत्वपूर्ण होगा। इससे छोटे और मध्यम उद्यम भारत-ईयू व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की स्थिति में आ सकते हैं।

भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों के विस्तार के साथ तकनीक, कौशल विकास, हरित ऊर्जा, टिकाऊ उत्पादन और कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

व्यापार के साथ शांति और समृद्धि पर भी चर्चा

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मजबूत व्यापारिक और निवेश संबंध केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि देशों और क्षेत्रों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की नींव मजबूत कर सकते हैं। भारत, यूरोप और व्यापक दक्षिण एशिया के बीच आर्थिक संपर्क बढ़ने से क्षेत्रीय समृद्धि और सतत विकास को भी गति मिल सकती है।

श्री अंकित जैन ने कहा कि भारत-ईयू सहयोग का अगला चरण व्यापार, स्थिरता और समावेशी आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर है। उनके अनुसार, विशेष ध्यान व्यवसायों, खासकर MSME की क्षमता बढ़ाने और तकनीक, डीकार्बोनाइजेशन तथा टिकाऊ अवसंरचना में नए सहयोग के अवसर विकसित करने पर होना चाहिए।

ब्रसेल्स में हुआ यह संवाद ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक व्यापार तेजी से पर्यावरणीय मानकों, कार्बन उत्सर्जन और टिकाऊ उत्पादन से जुड़ रहा है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों के अगले चरण में व्यापारिक अवसरों के साथ-साथ अनुपालन, हरित तकनीक और MSME क्षमता निर्माण जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संवाद का व्यापक संदेश यही रहा कि भारत-ईयू साझेदारी को केवल व्यापारिक समझौते तक सीमित रखने के बजाय इसे तकनीक, कौशल, टिकाऊ विकास, हरित अवसंरचना और समावेशी आर्थिक वृद्धि से जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे भारत और यूरोप के बीच आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने के साथ दक्षिण एशिया में शांति, समृद्धि और सतत विकास की दिशा में भी सकारात्मक आधार तैयार हो सकता है।

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