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सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शन पर तत्काल रोक नहीं, कारोबार के नुकसान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

व्यापारी संगठनों ने मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए ऐसे निर्धारित स्थान बनाए जाएं, जो शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों से दूर हों। इससे प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से चल सकेंगी। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदर्शनों के कारण लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इस दावे के जरिए याचिकाकर्ताओं ने त्योहारों के दौरान बाजारों की आर्थिक अहमियत और व्यापारिक नुकसान की आशंका को...

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • October 16, 2026 12:21 pm IST, Published 59 minutes ago

नई दिल्ली: त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली के बाजारों में कारोबार और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने काजपा के आज होने वाले प्रदर्शन को लेकर तत्काल कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शन के कारण व्यापार को नुकसान पहुंचता है, तो वह अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है। अदालत ने सभी पक्षों से समझदारी बरतने की उम्मीद जताई और मामले की अगली सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर को करने की बात कही।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मामले का उल्लेख करने वाले अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई से कहा कि अदालत को उम्मीद है कि सभी संबंधित पक्ष परिस्थितियों को समझते हुए जिम्मेदारी से काम करेंगे। कोर्ट ने त्योहारों के दौरान छोटे व्यापारियों की आजीविका के महत्व पर भी ध्यान दिलाया। अदालत के मुताबिक, इस समय दुकानदारों की कमाई पर उनके परिवारों की जरूरतें निर्भर करती हैं। ऐसे में व्यापारिक गतिविधियां बाधित होने से कई परिवारों के सामने आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस मामले में अलग-अलग हित जुड़े हुए हैं। एक तरफ लोग विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, दूसरी तरफ छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले अपनी रोजी-रोटी कमाना चाहते हैं। वहीं, शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने के बजाय परिस्थितियों पर नजर रखने का रुख अपनाया है।

यह याचिका दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की ओर से दाखिल की गई है। किराना कमेटी दिल्ली और दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका दायर कर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका 15 अक्टूबर 2026 को दाखिल की गई थी। इसमें केंद्र सरकार, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस आयुक्त को पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि, उनका तर्क है कि इस अधिकार के इस्तेमाल से दिल्ली के प्रमुख बाजारों तक पहुंच बाधित नहीं होनी चाहिए। खासकर त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है और कारोबारियों के लिए यह अवधि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में प्रदर्शन के कारण रास्ते बंद होने या यातायात प्रभावित होने से व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

व्यापारी संगठनों ने मांग की है कि विरोध प्रदर्शनों के लिए ऐसे निर्धारित स्थान बनाए जाएं, जो शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों से दूर हों। इससे प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा और बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां भी सामान्य रूप से चल सकेंगी। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदर्शनों के कारण लगभग 2,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इस दावे के जरिए याचिकाकर्ताओं ने त्योहारों के दौरान बाजारों की आर्थिक अहमियत और व्यापारिक नुकसान की आशंका को सामने रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल प्रदर्शन पर रोक लगाने या उसके आयोजन को लेकर कोई तत्काल आदेश नहीं दिया है। अदालत ने कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि आगे परिस्थितियां किस तरह सामने आती हैं। अब मामले की अगली सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इस सुनवाई में व्यापारिक गतिविधियों, सार्वजनिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन बनाने से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार होने की उम्मीद है।

 

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