नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजार में दिखाई नहीं दे रहा है। देश के अधिकांश बाजारों में चीनी की कीमत 60 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर बनी हुई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 30 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 64.24 रुपए प्रति किलोग्राम रही। एक सप्ताह पहले यह कीमत 63.12 रुपए प्रति किलोग्राम थी। यानी एक सप्ताह में खुदरा कीमत में करीब 1.77 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वहीं, एक महीने पहले की तुलना में चीनी की मौजूदा औसत खुदरा कीमत करीब 30 प्रतिशत अधिक है। 30 अगस्त को देश में चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 74 रुपए और न्यूनतम कीमत 40 रुपए प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
अलग-अलग शहरों में चीनी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। आंकड़ों के अनुसार:
इस तरह रांची में चीनी की कीमत इन प्रमुख शहरों में सबसे अधिक रही।
खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक बाजार में भी चीनी के भाव बढ़े हैं। 30 अगस्त को चीनी की औसत थोक कीमत 59.73 रुपए प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक सप्ताह पहले यह 58.66 रुपए प्रति किलोग्राम थी।
यानी थोक बाजार में भी एक सप्ताह के दौरान कीमत में करीब 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इस फैसले के बाद मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आने की बात सामने आई है।
हालांकि, मिल स्तर पर कीमतों में कमी के बावजूद खुदरा और थोक बाजार में उपभोक्ताओं को अभी इसका फायदा नहीं मिल रहा है। बाजार में कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं।
चीनी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। चाय, मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
अब निगाह इस बात पर है कि शुल्क-मुक्त आयात और सरकार के अन्य उपायों का असर खुदरा बाजार में कब तक दिखाई देता है और उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत कब मिलती है।