नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज, चुनावी प्रक्रिया और विपक्ष की आवाज को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों पर आरोप लगाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया और वोट के अधिकार से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठा रही है। खेड़ा ने दावा किया कि पार्टी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।
पवन खेड़ा ने राहुल गांधी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के संबंध में मीडिया में प्रसारित खबरों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि अदालत की टिप्पणी राहुल गांधी के लिए नहीं, बल्कि मामले में वादी नंबर छह के संदर्भ में थी। खेड़ा के अनुसार, आदेश सुनाते समय भी राहुल गांधी का नाम नहीं लिया गया था। उन्होंने मीडिया संस्थानों पर आरोप लगाया कि इस घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रस्तुत कर नेता प्रतिपक्ष की छवि प्रभावित करने की कोशिश की गई। कांग्रेस नेता ने संबंधित मीडिया संस्थानों से खबरों के संबंध में स्पष्टीकरण देने और गलती होने पर माफी मांगने की मांग की। हालांकि, इन आरोपों और अदालत की टिप्पणी के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित न्यायिक आदेश के आधार पर की जानी चाहिए।
खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस उच्चतम न्यायालय का सम्मान करती है और उसे भरोसा है कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर न्याय मिलेगा। उन्होंने पार्टी के अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष का उद्देश्य चुनाव के माध्यम से सत्ता में बदलाव लाना है। इसी संदर्भ में उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात करना विपक्ष की राजनीतिक भूमिका का हिस्सा है।
LIVE: Congress party briefing by Shri @Pawankhera at AICC Office, New Delhi https://t.co/64sq5pjLhw
— Congress (@INCIndia) October 16, 2026
कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी केंद्र सरकार से सवाल किए। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं। खेड़ा के मुताबिक, चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उठने वाली चिंताओं पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव आयोग से संबंधित सवाल उठाए जाते हैं, तो केंद्र सरकार के मंत्री और अन्य नेता जवाब देने सामने आते हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मीडिया संस्थानों के संपादकों के साथ बातचीत और कथित ऑफ-द-रिकॉर्ड ब्रीफिंग का भी उल्लेख किया।
खेड़ा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से संघ की विचारधारा का विरोध करती रही है। उनके आरोप के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में विश्वविद्यालयों, चुनाव आयोग और नौकरशाही जैसी संस्थाओं में एक विशेष विचारधारा का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने इसे व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस स्थिति में बदलाव लाने के लिए राजनीतिक संघर्ष जारी रखेगी। ये आरोप कांग्रेस नेता के राजनीतिक विचार हैं, जिन पर संबंधित संस्थाओं और सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
कांग्रेस नेता ने सरकार की ओर से आलोचकों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कथित शब्दों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लोगों को ‘देशविरोधी’, ‘दिमागी नक्सली’ या ‘लेफ्टिस्ट’ जैसे विशेषण देना असहमति के सवाल को दबाने का तरीका बन सकता है। खेड़ा ने इसे सरकार की बेचैनी से जोड़ते हुए दावा किया कि जनता के बीच सरकार के कामकाज और उसके राजनीतिक नैरेटिव को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।
पवन खेड़ा के बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस आने वाले समय में चुनावी प्रक्रिया, वोट के अधिकार, चुनाव आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को अपने राजनीतिक अभियान के प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाना चाहती है। वहीं, इन मुद्दों पर लगाए गए आरोपों और दावों का आकलन संबंधित तथ्यों, आधिकारिक दस्तावेजों और सभी पक्षों के बयानों के आधार पर किया जाना जरूरी होगा।