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राहुल गांधी का ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ पोस्ट, SIR मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दस्तावेजों में 14 तकनीकी खामियां भी बताई थीं। इनमें जरूरी दस्तावेजों की कमी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी जैसी आपत्तियां शामिल थीं। रजिस्ट्री ने इन कमियों को दूर करने के बाद याचिका पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही थी। विपक्षी नेताओं की ओर से खामियां दूर किए जाने के बाद अब मामले की सुनवाई होनी है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 27, 2026 10:26 am IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्लीः मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के 13 नेताओं की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। याचिका में विपक्षी नेताओं ने SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने, चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की जांच कराने और चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है। सुनवाई से पहले राहुल गांधी की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने एक्स पर ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ लिखा और भगवान शिव के त्रिपुंड की तस्वीर साझा की।

राहुल गांधी की इस पोस्ट को ऐसे समय में देखा जा रहा है, जब SIR के मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच कानूनी विवाद चल रहा है। हालांकि, पोस्ट के जरिए राहुल गांधी ने सुनवाई को लेकर अपनी मंशा या संदेश के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। इससे पहले उन्होंने विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन की तुलना भगवान शिव के तांडव से की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि विपक्ष की रणनीति किसी पूर्व निर्धारित योजना के तहत नहीं चल रही है। उन्होंने इसे शिव के तांडव और शिव की बारात से जोड़ते हुए कहा था कि इस प्रदर्शन में कोई भी शामिल हो सकता है।

विपक्ष की याचिका पर सुनवाई से पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर और सर्वसम्मति से लिए हैं। आयोग के अनुसार, इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का एकतरफा निर्णय नहीं किया गया। उसने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम जोड़ने या हटाने की कार्रवाई संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की सहमति के बाद ही की जा सकती है।

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में फॉर्म-6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के मुताबिक, फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह फॉर्म मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसके प्रभाव और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग की है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में विपक्षी नेताओं का विरोध प्रदर्शन भी शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। इसके बाद SIR से संबंधित मुद्दों को लेकर याचिका दायर की गई। मामले में 15 अक्टूबर को पहली सुनवाई हुई थी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। साथ ही, याचिका को SIR से जुड़े पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था।

याचिका दाखिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दस्तावेजों में 14 तकनीकी खामियां भी बताई थीं। इनमें जरूरी दस्तावेजों की कमी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट फोटोकॉपी जैसी आपत्तियां शामिल थीं। रजिस्ट्री ने इन कमियों को दूर करने के बाद याचिका पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही थी। विपक्षी नेताओं की ओर से खामियां दूर किए जाने के बाद अब मामले की सुनवाई होनी है। इस सुनवाई में विपक्ष की मांगों और चुनाव आयोग के जवाब पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण होगा। विपक्ष SIR प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और कथित चुनावी गड़बड़ियों की जांच से जुड़े सवाल उठा रहा है, जबकि आयोग ने अपने हलफनामे में निर्णय लेने की प्रक्रिया का बचाव किया है। अदालत इन दलीलों पर किस तरह विचार करती है और आगे क्या निर्देश देती है, यह सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।

 

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