अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिल्ली-NCR के सभी इलाकों में ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और वृद्धाश्रम जैसे संवेदनशील संस्थानों के आसपास 300 मीटर का क्षेत्र नो-क्रैकर जोन घोषित किया गया है। इन स्थानों पर किसी भी तरह के पटाखे जलाने की अनुमति नहीं होगी। इसका उद्देश्य बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और अन्य संवेदनशील लोगों को ध्वनि तथा वायु प्रदूषण से बचाना है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे नो-क्रैकर जोन की पहचान करके उनकी सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाए। साथ ही इन क्षेत्रों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को पहले से पता रहे कि कहां पटाखे जलाने पर प्रतिबंध है। अदालत ने विशेष रूप से कहा है कि बीमार और बुजुर्ग लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
ग्रीन पटाखों की बिक्री को लेकर भी अदालत ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। दिल्ली-NCR के विभिन्न जिलों के जिला कलेक्टरों और जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए निर्धारित स्थानों की पहचान करें। इन स्थानों का चयन संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ विचार-विमर्श करके किया जाएगा। प्रशासन की अनुमति वाले बिक्री केंद्रों के अलावा किसी अन्य स्थान पर पटाखे बेचने की इजाजत नहीं होगी। अदालत ने ग्रीन पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगा दी है। यानी दिवाली के दौरान इंटरनेट या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से पटाखे खरीदने और बेचने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा अवैध और पारंपरिक पटाखों की बिक्री रोकने के लिए वाहनों की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन और पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रतिबंधित पटाखे बाजार तक न पहुंचें। सुप्रीम कोर्ट ने दुकानदारों और बिक्री केंद्रों के लिए भी विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। सभी निर्धारित दुकानों पर जागरूकता संबंधी बैनर लगाना अनिवार्य होगा। इन बैनरों के माध्यम से लोगों को बताया जाएगा कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CSIR-NEERI) से अनुमोदित ग्रीन पटाखों की पहचान किस तरह की जा सकती है। दुकानदारों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पटाखे उचित तरीके से सीलबंद डिब्बों में ही बेचे जाएं।
अदालत के निर्देशों का मुख्य उद्देश्य त्योहार की खुशियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है। दिल्ली-NCR में हर साल दिवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्रीन पटाखों को लेकर निर्धारित समय, बिक्री केंद्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों के नियमों का पालन बेहद जरूरी होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से दिवाली पर सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे जलाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, लोगों को ध्यान रखना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई हो सकती है। अब प्रशासन के सामने इन निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू कराने और लोगों को जागरूक करने की चुनौती होगी।