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फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण, न मंजूरी दी, न खारिज किया

जब बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नए फॉर्म-6 को लेकर चर्चा चल रही है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस फॉर्म को लेकर अदालत की कथित मंजूरी के दावे पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने साफ किया कि नए फॉर्म-6 के संबंध में उसकी ओर से कोई स्वीकृति या अस्वीकृति नहीं दी गई है।

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  • October 12, 2026 2:44 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा कि नए फॉर्म-6 को न तो मंजूरी दी गई है और न ही इसे खारिज किया गया है। इस फॉर्म पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई न्यायिक निर्णय नहीं दिया है, क्योंकि बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान यह फॉर्म अदालत के सामने रखा ही नहीं गया था। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि खबर बनाने के लिए अदालत की टिप्पणियों को चुन-चुनकर पेश नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नए फॉर्म-6 को लेकर चर्चा चल रही है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। ऐसे में इस फॉर्म को लेकर अदालत की कथित मंजूरी के दावे पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने साफ किया कि नए फॉर्म-6 के संबंध में उसकी ओर से कोई स्वीकृति या अस्वीकृति नहीं दी गई है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जिस सुनवाई का हवाला दिया जा रहा है, उसमें नया फॉर्म विचार के लिए पेश नहीं हुआ था।

मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि 5 अक्टूबर को हुई कार्यवाही के दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि नए फॉर्म-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी नहीं मिली है। वकील ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद निर्वाचन आयोग की ओर से यह कहा गया कि फॉर्म-6 को अदालत ने मंजूरी दी है। इस दावे के बाद सुनवाई के दौरान फॉर्म को लेकर न्यायालय की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का मुद्दा उठा।

इस पर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि नए फॉर्म-6 को मंजूरी देने के संबंध में अदालत ने कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई के समय नया फॉर्म-6 अदालत के समक्ष मौजूद नहीं था। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि न्यायालय ने इस फॉर्म की जांच करके उसे स्वीकार या अस्वीकार किया है। अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य उसके आदेश और कार्यवाही को लेकर किसी तरह की गलतफहमी दूर करना था।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समाचार बनाने के उद्देश्य से अदालत के शब्दों को चुन-चुनकर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग में संदर्भ और पूरे घटनाक्रम को सही तरीके से सामने रखने की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है। अदालत की टिप्पणियों को उनके पूरे संदर्भ में समझना जरूरी होता है, ताकि किसी मौखिक टिप्पणी को अंतिम न्यायिक आदेश या औपचारिक मंजूरी के रूप में पेश न किया जाए।

बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा करना और उसमें जरूरी संशोधन करना है। इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने, गलत प्रविष्टियों को दुरुस्त करने और सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की जाती है, इसलिए इसके प्रारूप और इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता जरूरी है। किसी भी नए प्रारूप या प्रक्रिया के संबंध में निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देशों और अदालत के वास्तविक आदेशों के बीच अंतर समझना भी आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि नए फॉर्म-6 को लेकर अदालत की ओर से मंजूरी दिए जाने का दावा सही नहीं माना जा सकता। हालांकि, इस टिप्पणी का अर्थ यह भी नहीं है कि अदालत ने फॉर्म को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने केवल यह स्पष्ट किया है कि उसने इस फॉर्म की जांच नहीं की और इस पर कोई फैसला नहीं दिया। अब इस मामले में आगे की स्थिति संबंधित आधिकारिक निर्देशों और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर स्पष्ट होगी।

 

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