नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवात ‘अर्नब’ का असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में दिखाई दे रहा है। चक्रवात के उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट से टकराने के बाद दोनों राज्यों में तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हो रही है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है और यातायात भी प्रभावित हुआ है।
चक्रवात के खतरे को देखते हुए ओडिशा के 10 जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मलकानगिरी में चार पुल पानी में डूब गए, जिसके कारण कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है। सुरक्षा को देखते हुए कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों को भी बंद किया गया है।
भद्रक में तेज हवाओं के कारण मछुआरों की करीब 10 नावें डूब गईं, जबकि कई अन्य नावों को नुकसान पहुंचा है। चिल्का झील क्षेत्र में भी कई नावों के टूटकर डूबने की सूचना है।
मौसम विभाग ने नबरंगपुर जिले के लिए लाल चेतावनी जारी की है। यहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा बरगढ़, नुआपाड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, कोरापुट और मलकानगिरी में नारंगी चेतावनी जारी की गई है।
प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में चक्रवात के प्रभाव से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। विजयवाड़ा के निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।
मछुआरों को शुक्रवार सुबह तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन और राहत दल तटीय इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
चक्रवात का प्रभाव पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के अलावा दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में भी देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।
इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर और कर्नाटक में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने देश के कुल 22 राज्यों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग ने लोगों से स्थानीय प्रशासन और मौसम संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।